
दैनिक खोज खबर/तरैया (सारण)। तरैया प्रखंड के चंचलिया दियारा क्षेत्र में गंडक नदी पर तीन लेन पुल और एप्रोच रोड का निर्माण कार्य शुरू होते ही विवाद खड़ा हो गया है। स्थानीय भू-धारकों ने बिना सहमति और जमीन की पैमाइश के काम शुरू करने का आरोप लगाते हुए निर्माण कार्य रोक दिया। ग्रामीणों का कहना है कि स्थानीय प्रशासन उनकी जमीन को ‘टोपो लैंड’ बताकर बिना मुआवजा दिए अधिग्रहण करने का प्रयास कर रहा है। विवाद की सूचना मिलने पर महाराजगंज के सांसद जनार्दन सिंह सिग्रीवाल, छपरा के सांसद राजीव प्रताप रूडी और मढ़ौरा की एसडीओ निधि राज शनिवार को चंचलिया दियारा पहुंचे। वहां उन्होंने प्रभावित ग्रामीणों और भू-धारकों के साथ बैठक कर उनकी शिकायतें सुनीं। बैठक में भू-धारकों ने तरैया अंचल कार्यालय और सीओ पर आरोप लगाया कि जमीन को टोपो लैंड बताकर मामले को जटिल बनाया जा रहा है। ग्रामीणों ने तर्क दिया कि वे वर्षों से इस भूमि की मालगुजारी रसीद कटवा रहे हैं, सरकार को लगान दे रहे हैं और भूमि की खरीद-बिक्री व नामांतरण भी नियमित रूप से हो रहा है। ऐसे में इसे टोपो लैंड मानना गलत है। इस परियोजना से कुल 62 भू-धारक प्रभावित हो रहे हैं। इनमें से 40 रैयतों ने अपने दस्तावेज अंचल कार्यालय में जमा करने का दावा किया है, जबकि अंचल प्रशासन केवल 20 लोगों के दस्तावेज मिलने की बात कह रहा है। समस्या के समाधान के लिए सांसद जनार्दन सिंह सिग्रीवाल ने जिलाधिकारी से फोन पर बात की और गांव में विशेष शिविर लगाने का सुझाव दिया। वहीं सांसद राजीव प्रताप रूडी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी प्रभावितों के आवेदन स्वीकार कर जांच फाइल वरिष्ठ अधिकारियों को भेजी जाए। मढ़ौरा एसडीओ निधि राज ने ग्रामीणों से अपील की कि वे शिविर में अपने भूमि संबंधी दस्तावेज जमा करें, ताकि रैयतों की पहचान कर मुआवजा वितरण की प्रक्रिया जल्द शुरू की जा सके। बैठक में सीओ पंकज कुमार सिंह और स्थानीय जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।




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