
पचरुखी चीनी मिल मामले में सीएम ने लिया संज्ञान, फिर भी जिला प्रशासन है अंजान
ロ पचरुखी से विपेन्द्र कुमार की रिपोर्ट :
पचरुखी (सिवान) : स्थानीय चीनी मिल की जमीन की औने-पौने दाम में नीलामी के बाद प्रशासन द्बारा भारी पुलिस बल के साथ पैमाइश करा कर जमीन को सौंपने की तैयारी से लोगों में आक्रोश हैं। जिससे स्थानीय लोगों में स्थानीय विधायक श्याम बहादुर सिंह के कार्यशैली के प्रति नाराजगी भी है। जो चुनावी मौसम में घातक भी हो सकता है।चीनी मिल की नीलामी के प्रबल विरोधी किसान नेता उमेश कु. भाजयुमो नेता त्रिलोकी सिंह, चुन्नु सिंह,अमरेश सिंह, विक्की, हरेराम सिंह, चंद्रमा सिंह, दरोगा सिंह समेत दर्जनों लोगों का कहना है कि जदयू जब सरकार में नहीं थी उस समय अपने चुनावी भाषण के दौरान सूबे के बर्तमान मुखिया नीतीश कुमार ने पचरुखी में बंद पड़ी चीनी मिल को चालू करने का वादा किया था। मौजूदा विधायक श्यामबहादुर सिंह भी उन दिनों चीनी मिल चालू करने के नाम पर खूब जनसमर्थन बटोरा। मगर सत्ता में आते ही जदयू और उनके नेताओ के लिए चीनी मिल का मामला अछूत सा हो गया हैं। परिणामस्वरूप चीनी मिल नीलाम हो गयी।
कई लोग यह कह रहे हैं कि इस बार लोकसभा सहित विधानसभा के चुनाव में चीनी मिल की जमीन की नीलामी का मुद्दा, प्रमुख मुद्दा रहेगा। कारण चाहे जो हो लेकिन देश को प्रथम राष्ट्रपति देने वाले जिले में डा•राजेन्द्र प्रसाद के नाम से कोई संस्थान नहीं है,सिवाय कुष्ठ आश्रम के। जिले में केंद्रीय विद्यालय के लिए जमीन नहीं मिल रही है और राष्ट्रीय उच्च पथ पर स्थित अरबों की जमीन, चंद लाख रुपये मात्र के लिए नीलाम हो जाती है। तो फिर कहने को कुछ शेष नहीं रह जाता है। भू-माफियाओं के चंगुल से जमीन को बचाने के लिए एक तरफ जहां लाउडस्पीकर से ऐलान हो रहा है।वहीं दूसरी तरफ जनप्रतिनिधियों के प्रति लोग आक्रोशित हैं। ऐसे में एक बुद्धिजीवी ने एक जागरूक नागरिक के कर्तव्य का निर्वहन करते हुए इसे मुख्यमंत्री के समक्ष रखते हुए नीलामी से बचाने की गुहार लगायी है।जिसकों लेकर मुख्यमंत्री ने संज्ञान लेकर मामलें को जांच कराने को निर्देश दिया हैं। सीएम ने इस मेल को सिवान जिलाकारी व गन्ना विकाश विभाग के सचिव को भेजा है। मगर जिला प्रशासन इसपर करवाई के वजाय जमीन की पैमाइश करा रहा है।




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