“टाटा आएगी तो पैसेंजर जाएगी” !! हाल छपरा जंक्शन का
विनीत कुमार, छपरा
अब तक एक्सप्रेस ट्रेन से सफर करनेवाले यात्री ही हलकान परेशान थे लेकिन आज छपरा जंक्शन से सिवान की ओर जानेवाली दैनिक यात्रियों व नौकरीशुदा लोगो को इस सवारी गाड़ी ने खूब रुलाया है।
छपरा से चलकर भटनी जानेवाली एक सवारी गाड़ी है। इसका नम्बर 55009 है। दरअसल यह ट्रेन काफी लंबे समय से चल रही है। पुराने समय मे इसे सेटल या सेटलवा कहा जाता था। इसका क्या मतलब ये हम नही जानते यदि आपको पता हो तो बताइयेगा।
मुझे लगता है कि छपरा काम करने आनेवाले अधिकांश लोग इस सवारी गाड़ी के दैनिक यात्री हैं। यह सवारी गाड़ी छपरा जंक्शन से संध्या 17:45 में सिवान भटनी के लिए प्रस्थान करती है मगर आज यह अपने नियत समय से 2 घण्टे 15 मिनट की देरी से गयी है।संध्या 17:45 में प्रस्थान करनेवाली यह सवारी गाड़ी आज रात्रि के 20:00 बजे छपरा जंक्शन से गयी है।

वास्तव में यह ट्रेन रेलवे के इस मैनेजमेंट के अनुसार चलती है और जब भी यह मैनेजमेंट फेल होता है तो समझिए कि सवारी गाड़ी पीट जाती है। इस गाड़ी का मैनेजमेंट का फॉर्मूला यह है कि “टाटा आएगी तो पैसेंजर जाएगी” बस पास फेल की सारी थ्योरी इधर ही अटकी है।
यदि टाटानगर से चलकर छपरा आनेवाली 18181 अप टाटा छपरा एक्सप्रेस जिसके छपरा जंक्शन आने का नियत समय 16:25 बजे है यह समय से आएगी तो 55009 सवारी गाड़ी भी समय से जाएगी। यदि टाटा लेट है तो समझिए कि पैसेंजर भी लेट होगी। कारण कि टाटा छपरा एक्सप्रेस का इंजन काटकर ही इस सवारी गाड़ी में लगा दिया जाता है। टाटा में इलेक्ट्रिक इंजन है जिसे इस सवारी गाड़ी में लगा दिया जाता है लेकिन अफसोस कि आज टाटा छपरा एक्सप्रेस संध्या 17:45 में ही छपरा आयी है। मतलब की सवारी गाड़ी के खुलने के समय मे ही आयी है जिस कारण सवारी गाड़ी इतनी विलम्ब हुई है।

छपरा जंक्शन (फाइल फ़ोटो)


अभी रेलवे के इस एडजस्टमेंट को भी समझ ही लीजिये ताकि अगली बार आप ऐसा फंसने से बच सकें, समझिये कि कितनी माथापच्ची है :-
टाटा छपरा का रेक जब छपरा आ जाता है तो फिर यही रेक छपरा आने के बाद फिर उत्सर्ग एक्सप्रेस (18191) बनकर फरूखाबाद के लिए जाता है जिसका नियत समय छपरा जंक्शन से प्रस्थान करने का 18:00 बजे है।
पुनः यही उत्सर्ग एक्सप्रेस (18192) सुबह 09:13 बजे छपरा आती है और फिर उत्सर्ग एक्सप्रेस का यह रेक टाटा छपरा में तब्दील हो जाता है और फिर टाटा छपरा एक्सप्रेस, छपरा टाटा (18182) बनकर टाटा के लिए दोपहर 12:35 में प्रस्थान करती है।
वही टाटा छपरा का इलेक्ट्रिक इंजन लेकर भटनी जानेवाली छपरा भटनी सवारी गाड़ी (55009) छपरा जंक्शन से संध्या 17:45 में प्रस्थान करती है व अगले दिन वापसी में यही सवारी गाड़ी भटनी छपरा सवारी गाड़ी (55010) बनकर इलेक्ट्रिक इंजन के साथ छपरा सुबह के 9:55 बजे आती है और फिर यही इलेक्ट्रिक इंजन छपरा टाटा को लेकर 12:35 में रवाना होता है।
रेलवे का यह रोज का काम है, यूँ समझिये की रोज की माथापच्ची है। अच्छा है कि इससे डीजल की बचत हो जाती है। लेकिन सोंचिये की वाराणसी मण्डल के प्रमुख स्टेशनों में से एक छपरा जंक्शन के पास समय से चलाने के लिए एक डीजल इंजन या इलेक्ट्रिक इंजन नही है तभी तो टाटा एक्सप्रेस के इंतजार में सवारी गाड़ी खड़ी रहती है और दैनिक यात्री परेशान रहते हैं।
जब भी टाटा लेट होती है सवारी गाड़ी लेट हो ही जाती है और इसका कोई वैकल्पिक उपाय फिलहाल तो छपरा स्टेशन अधीक्षक या परिचालन से जुड़े अधिकारियों के पास नही है। यदि कोई वैकल्पिक व्यवस्था हो तो बताइयेगा जरूर। फिलहाल बेहतरी के चाहे जितने भी दावे रेल प्रशासन कर ले, सच्चाई यही है कि टाटा आएगी तो पैसेंजर जाएगी।
अंत मे बस निवेदन इतना करना चाहूंगा रेल अधिकारियों से कि पटना गया लाइन (PG LINE) पर सवारी गाड़ी के परिचालन से थोड़ी सीख लेने, जानने समझने की आवश्यकता है कि आखिर इस रेलखण्ड पर सवारी गाड़ियां इतनी समय से कैसे चलती हैं।
कारण कि पटना गया के बीच 92 किलोमीटर की ये दूरी पटना गया लाइन की सवारी गाड़ियां अमूमन 2 घण्टे 45 मिनट या 50 मिनट में तय करती है। हर स्टेशन के अतिरिक्त प्रत्येक हाल्ट पर सवारी गाड़ियो का ठहराव है मान के चलिये कि कमोबेश 50 के आसपास ठहराव है इन सवारी गाड़ियों का पटना गया के बीच मे लेकिन फिर भी ये अपने नियत समय से 5-10 मिनट से अधिक लेट नही होती। अपवाद की बात और है।