जयप्रकाश विश्वविद्यालय में करोड़ो के वेतन निर्धारण में घोटाला का आर एस ए ने लगया आरोप
#विश्वविद्यालय का पूर्व से है घोटालो का गहरा रिश्ता, पहले भी हुआ था कॉपी घोटाला उजागर
#रिपोर्ट -संजय कुमार पांडे /वि.वि.छपरा

छपरा (वि वि) :सारण की धरती शुरू से महापुरुषों की कर्मभूमि एवं जन्म भूमि रहीं है।इन महापुरुषों के नाम को यादगार बनाने के लिए इनके नाम पर पर सरकार ने अनेको संस्थान खोल रखे है।लेकिन इन संस्थान की गतिविधियां कभी कभी इन महापुरुषों के नाम को भी डुबो देती है। समग्र क्रांति के प्रणेता जयप्रकाश नारायण के नाम पर छपरा में जय प्रकाश विश्वविद्यालय की स्थापना की गई ।स्थापना काल से लेकर आज तक के इतिहास पर यदि नजर डाले तो यह विश्वविद्यालय अपने अच्छे कारनामे के लिए कम एवं गलत कार्यो के लिए ज्यादा ख्याति प्राप्त किया है । जब से इस विश्वविद्यालय की स्थापना हुई तब से ले आज तक सबसे ज्यादा दुर्दशा शिक्षा का हुआ।कभी भी सही तरीके से सत्र का संचालन नही हुआ।अब तो इधर कुछ वर्षों से इस विश्वविद्यालय घोटालो का दौर चल रहा है।कभी कॉपी घोटाला तो कभी नियुक्ति के लिए विज्ञापन निकल कर नियुक्ति नही करना तथा वेरोजगार युवकों के फार्म का रुपया नही लौटा कर उनके रु का घोटाला।इन घोटाला के दौर का खुलासा होना शुरू हुआ जब 2013 में इस विश्वविद्यालय के कुलपति बने इलाहाबाद विश्वविद्यालय प्रो डॉ डी के गुप्ता । आते के साथ ही इन्होंने सबसे पहले एन ओ सी प्राप्त 53 माहाविद्यालय के नामांकन पर रोक लगा दिए जिससे यहाँ के छात्रो का पढ़ाई बाधित हुआ ।इसके बाद परीक्षा लेने के लिए इन्होंने ब्लेंक उत्तर पुस्तिकाओं की खरीदारी की जिसमे एक करोड़ 28 लाख रु का घोटाला हो गया।जिसमें कुलपति सहित विश्वविद्यालय के विभिन्न पदाधिकारी एवं कर्मचारी चार्जसिटेड हुए ।अभी यह केश चल ही रह है ।बताते चले के उस समय इस घोटाले को उजागर करने में उस समय के आर एस ए संगठन के छात्र नेता विश्वजीत चंदेल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उसके बाद तो इस विश्वविद्यालय के पढ़ाई का काम ही खत्म हो गया। सत्र विलम्ब का सारा रेकॉर्ड टूट गया कार्यवाहक कुलपातु काम चलते रहे।इसके बाद स्थाई कुलपति की नियुक्ति डॉ हरिकेश सिंह के रूप में हुई और आज इनके कार्यकाल में हो गया वेतन घोटाला ।
उसके बाद तो इस विश्वविद्यालय के पढ़ाई का काम ही खत्म हो गया। सत्र विलम्ब का सारा रेकॉर्ड टूट गया कार्यवाहक कुलपातु काम चलते रहे।इसके बाद स्थाई कुलपति की नियुक्ति डॉ हरिकेश सिंह के रूप में हुई और आज इनके कार्यकाल में हो गया वेतन घोटाला ।उपरोक्त सभी आरोप छात्र संगठन आर एस ए ने लगया है ।
#आइए नजर डाले आर एस ए द्वारा लगाये गये नये आरोप ताजा वेतन घोटाले पर-
उच्चतम न्यायालय के न्यायिक आदेश के आलोक में बिहार के सभी विश्वविद्यालयो के शिक्षकेत्तर कर्मचारियो के लिए सुनिश्चित वृति उन्नयन योजना को लागू कर उसके आधार पर वेतन निर्धारण कर बकाए वेतन का भुगतान करने का आदेश सरकार द्वारा दिया गया था।इसी आलोक में जय प्रकाश विश्वविद्यालय के कुलपति द्वारा ए स पी /एम ए सी पी के तहत कर्मचारियो के वेतन निर्धारण हेतु एक उच्च स्तरीय कमिटी बनाई गई।इस कमिटी में डॉ कन्हैया जी वर्मा वनस्पति विभाग,डॉ आर पी श्रीवास्तव अर्थशास्त्र ,डॉ विनोद कुमार सिंह अंग्रेजी विभाग,सहायक अजय कुमार श्रीवास्तव शामिल थे।नियम है कि वेतन निर्धारण समिति का कोई कर्मचारी पूर्णतः सदस्य नामित नही हो सकता लेकिन वित्त एवं लेखा शाखा में पदस्थापित अजय कुमार श्रीवास्तव को शामिल किया गया।ये सभी मिलकर निर्धारित वेतनमान से काफी अधिक वेतन निर्धारित कर दिया।इसका उदाहरण देते हुए प्रेस कॉन्फ्रेंस में छात्र संगठन आर एस ए के नेताओ ने कहा कि शिक्षा विभाग के आदेशानुसार 20. 12 .2000 के बाद नियुक्त कर्मचारी निम्नवर्गीय कहे जाएंगे तथा उन्हें 3050–4950 का वेतन अनुमान्य है 01 .01.2006 तथा अपग्रेड 1900 में का वेतन अनुमान था लेकिन एक सुनियोजित साजिश के तहत 20.12.2000 के बाद नियुक्त कर्मचारियो को 4000–6000 से वेतन में निर्धारित कर उन्हें 1900 के बदले 2400 ग्रेड पे के आधार पर बकाया वेतन का भुगतान किया गया परिणाम हुआ प्रत्येक कर्मचारी को प्रारंभिक स्तर पर ही हर महीने 5000 रु अधिक भुगतान किया गया।ऐसे लिपिक की संख्या विश्वविद्यालय 2000 से अधिक है।इस तरह केवल एक मामले में ही करोड़ो रु की सरकारी राशि का गवन एवं लूट हुआ ।
ऐसे ऐसे करके कुल 30 करोड़ का घोटाला विश्वविद्यालय में हुआ है।
इस प्रेस कांफ्रेंस में कुणाल ,रणवीर ,विवेक,मनीष, रोहिणी,निधि ,पूनम,अर्पित के साथ बहुत से छात्र नेता एवं नेत्री उपस्थित थे।