छपरा में प्री पीएचडी कोर्स वर्क तृतीय बैच में नामांकन सीटों का निर्धारण गलत : आर. एस. ए.
छपरा : जयप्रकाश विश्वविद्यालय छपरा में प्री पीएचडी कोर्स वर्क तृतीय बैच में जो नामांकन हो रहे हैं। विश्वविद्यालय के द्वारा जो सीट निर्धारित किया गया है वह पूरी तरह से गलत तरीके से निर्धारित किया गया है ।भौतिकी में 20 ,रसायन शास्त्र में 60, जंतु विज्ञान में 50, वनस्पति विज्ञान में 20 ,गणित में 70 ,अर्थशास्त्र में 40 ,राजनीति शास्त्र में 35, मनोविज्ञान में 10 , इतिहास में 10 ,भूगोल में 15 ,हिंदी में 60, अंग्रेजी में 40 ,संस्कृत में 15, उर्दू में 20, दर्शन शास्त्र में 7, वाणिज्य 30 सीट का निर्धारण पूरी तरह से गलत है ।उक्त बातें आर. एस. ए. के विश्वविद्यालय अध्यक्ष सह काउंसिल मेंबर अर्पित राज गोलू ने कहीं । उन्होंने ये भी कहा की रसायन शास्त्र ,जंतु विज्ञान इतना ज्यादा सीट दे दिया गया है जबकि विभाग के पास प्रयोगशाला भी नहीं है एक एक रूम में विभाग चलते हैं, इंफ्रास्ट्रक्चर की भारी कमी है। उसके बाद भी इतनी सीट पीएचडी कराने के लिए उस विभाग को दे देना अपने आप में हास्यपद है । सबसे पॉपुलर विषय मनोविज्ञान एवं इतिहास हैं उसमे मात्र खानापूर्ति के लिए 10 सीट का निर्धारण करना अपने आप में आश्चर्यजनक है । अगर सीट नहीं थी तो विश्वविद्यालय को उतना रिजल्ट देना ही नहीं चाहिए था। सीटों का निर्धारण शिक्षकों के पास सीट उपलब्धता के आधार पर होता है । बहुत सारे शिक्षकों का अंदर में पीएचडी जो छात्र कर रहे हैं उनका शोध ग्रंथ सबमिट हो चुका है ,उनका भी सीट काट लिया गया है ।उनकी रिक्तियों को जोड़ा नहीं गया है। बहुत सारे छात्रों का सबमिट 2 से 3 माह में जमा होंगे उनकी रिक्तियां में भी भारी कटौती कर दी गई है। जबकि यह कोर्स वर्क छह माह तक चलेगा उसके बाद ही छात्रों को गाइड अलर्ट किए जाएंगे सीट अलॉटमेंट में विश्वविद्यालय प्रशासन ने भारी लापरवाही बरती है। विश्वविद्यालय प्रशासन को मालूम है कि इसके बाद प्री पीएचडी टेस्ट एग्जाम नहीं होंगे । उसके बावजूद भी उच्च शिक्षा से वंचित करने के लिए सारण प्रमंडल के छात्रों के साथ सोची समझी साजिश के तहत योजनाबद्ध तरीके से इस तरह के घिनौना कार्य किया है । विश्वविद्यालय प्रशासन से संगठन मांग करती है कि जो रिक्तियां निर्धारित की गई है उस पर तुरंत संशोधित किया जाए । अन्यथा संगठन बाध्य होकर आंदोलन करने पर उतारू होगा जिसकी सारी जवाबदेही विश्वविद्यालय प्रशासन की होगी।