*गांव प केंद्रित आखर ई भोजपुरी पत्रिका के तीसरा साल के तीसरा अंक*

प्रनाम आ जय भोजपुरी
आखर ई पत्रिका : वर्ष – 3 अंक – 3 ( संयुक्तांक )
जवना बड़-तर साल-भर रहे मेल के खेल
अब ओह पर बा छा रहल , बैर-फूट के बेल ।
तैयब हुसैन पिड़ीत जी के समकालीन दोहा , बहुत एह बात के बतावे खातिर कि गांव के स्थिति का ओह बड़ ( बर ) के फेंड़ लेखा नइखे हो गइल जंहवा कबो गांव के नया पुरान सबकर मेल होत रहे उहे बड़ के गांछ , उहे फेंड़ अब आपसी बैर-भाव के घटे वाली कहानी रोजे देख रहल बा ?
आखर ई पत्रिका के अगिला अंक यानि कि वर्ष – 3 अंक-3 रउवा सभ के सोझा ले आवत जवन खुशी आखर टीम के हो रहल बा , उहे खुशी आखर ई पत्रिका से जुड़ल भोजपुरी भाषा प्रेमी लोगन के एह पत्रिका के पढला के बाद होइ । आखर इ पत्रिका के एह अंक में भोजपुरी भाषा क्षेत्र आ समाज के जहाँ अनुभव बा ओजुगे नया जोश आ होश के संचार बा । एह अंक में जहाँ गाव से जुड़ल लइकाईँ के याद बा त ओजुगे गांव के बदलत सरुप अलग अलग रुप में भाषा आ साहित्य के हर विधा में सोझा आ रहल बा ।
अनिल ओझा ‘ नीरद ‘ जी लिखत बानी –
“चल देखि आईँ बगिया बहार मितवा
बगिया के बिचवा जे छोटकी पोखरिया
झिलमिल पनियाँ से खेलेला चनरमा
जब झुरझुर बहेला बयार , मितवा । ”
आखर ई पत्रिका के एह नया अंक के माध्यम से कोशिश इहे बा कि आखर टीम , एह पत्रिका में नया पुरान अनुभवी आ जोशीला लेखक लोगन के रचना, लेख, गीत, कविता, संस्मरण , चित्रकथा , बालकहानी आदि के माध्यम से रउवा सभ गांव के दर्शन कराओ । कोशिश बा कि गांव के वर्तमान स्थिति से साहित्य के माध्यम से परिचय करावो ।
गांव प केंद्रित तीसरा साल के तीसरा अंक रउवा सभ के नेह छोह दुलार प्यार खातिर प्रस्तुत बा , अबतक के हर अंक के जइसे रउवा सभ के आशिर्वाद आ प्यार मिलल बा , हमनी के पुरा विश्वास बा कि एहू अंक के ओइसहीं प्यार दुलार मिली रउवा सभ के आशिर्वाद मिली जवना में भींज के आखर टीम अगिला अंक खातिर कुछ अउरी बेहतर करे के प्रयास करी ।
अबहीं प्रस्तुत बा आखर ई पत्रिका के तीसरा साल के तीसरा अंक –
डाउनलोड लिंक – http://www.aakhar.com/index.php/151-mayjun17
जय भोजपुरी
राउर आपने
आखर टीम




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