ख़ान शैख़ून के रासायनिक हमले की जांच के विरोध के पीछे पश्चिम की नीयत कुछ और है, रूस
खबरें देश विदेश ः अब्दुल मुत्तलिब रज़ा
रूस ने कहा है कि सीरिया के इदलिब प्रांत के ख़ान शैख़ून क्षेत्र में रासायनिक हथियार के इस्तेमाल के दावे की जांच कराने के लिए ईरान और रूस ने रासायनिक हथियार निरोधक संस्था के सामने जो प्रस्ताव रखा था, उसका पश्चिम इसलिए विरोध कर रहा है क्योंकि वह सीरिया में शासन बदलने के विचार पर ध्यान मोड़ना चाहता है।
आस्ताना से स्पूतनिक न्यूज़ के अनुसार, रूसी विदेश मंत्री सिर्गेई लावरोफ़ ने शुक्रवार को अपने चीनी समकक्ष वांग यी से मुलाक़ात में कहा कि कल ईरान और रूस ने, रासायनिक हथियार निरोधक संस्था के विशेषज्ञों के सामने सीरिया में रासायनिक हथियार के इस्तेमाल के संदिग्ध स्थलों के निरीक्षण का प्रस्ताव रखा था जिसे पश्चिमी प्रतिनिधिमंडलों ने बिना किसी तर्क के रद्द कर दिया।
रूसी विदेश मंत्री ने कहा कि सीरियाई सरकार द्वारा रासायनिक हथियार इस्तेमाल किए जाने की बातें फैलाना ऐसी चाल है, जिसका लक्ष्य संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव नंबर 2254 के लागू होने की ओर से जनमत का ध्यान हटाना है, ताकि इस तरह दमिश्क़ में शासन बदलने का विचार फिर से ज़ोर पकड़े। ग़ौरतलब है कि सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव नंबर 2254 में इस बात पर बल दिया गया है कि सीरिया की समस्या का हल राजनैतिक मार्ग से निकाला जाए और इस प्रक्रिया में सभी सीरियाई पक्ष शामिल हों।
उधर हेग में रासायनिक हथियार निरोधक संस्था में रूस के प्रतिनिधि एलेक्सांद्र शोलगिन ने कहा है कि उनका देश इस बात की पूरी कोशिश करेगा कि इस संस्था की जांच कमेटी सीरिया के इदलिब प्रांत में हुयी रासायनिक घटना के बारे में उचित जांच करे।
इस बात के वावजूद कि सीरियाई सरकार 2014 में अपने रासायनिक हथियारों का भंडार रासायनिक हथियार निरोधक संस्था व संयुक्त राष्ट्र संघ के प्रतिनिधि के हवाले कर चुकी है, अमरीका ने 7 अप्रैल तड़के इस बहाने से सीरिया पर 59 मिसाईल दागी थीं।




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