किसान-मजदूर विरोधी है राज्य सरकार : भाकियू
# बगैर पूर्व तैयारी के लागू कर दिया जमाबंदी जैसा काला कानून
छपरा(सारण)। सूबे में राज्य सरकार द्वारा अचानक लागू किए गए बिहार जमाबन्दी कानून से किसान तबका परेशान है।बगैर किसी ठोष तैयारी के एकाएक जमाबन्दी कानून किसानों पर थोप दी गयी है जो पूरी तरह अलोकतांत्रिक है।इस नये कानून को लागू कर राज्य सरकार ने छोटे और मझोले किसानों की कमर तोड़ दी है।
ये बातें भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश प्रवक्ता प्रमोद सिंह टुन्ना ने कही। उन्होंने कहा कि भारतीय किसान यूनियन इस कानून के लागू करने के तरीके का विरोध करती है।किसान-मजदूर विरोधी इस कानून के विरोध में राज्य के किसानों को एकजूट कर एक बड़ा आंदोलन खड़ा करने पर भारतीय किसान यूनियन विचार कर रही है।गांवो में किसानों की जमीनें सदियों से दादा-परदादा के नाम से से है।उन्हीं के नाम पर जमाबंदी भी होती है। हर ब्यक्ति के नाम पर जमाबंदी कराने में परेशानी किसी से छूपी नहीं है।एक दाखिल-खारिज कराने मे सरकारी बाबू किसानों से छह हजार रुपये की उगाही करते है।तब जाकर कहीं रजिस्टर दो पर नाम चढाया जाता है।जो रिश्वत का पैसा नहीं देता है उसके काम में तकनीकी अड़ंगा लगाकर कर्मचारी परेशान करते है।
श्री टुन्ना ने कहा कि होना तो यह चाहिए कि पूरे प्रदेश में पहले शिविर लगाकर हर ब्यक्ति के नाम से नि:शुल्क दाखिल-खारिज कराने के बाद ही इस कानून को लाना चाहिए था। पारिवारिक भूमि बंटवारे के लिए टाईमलाईन का घोषणा करना चाहिए था। उन्होंने आगे कहा कि कोई भी किसान मुसीबत के वक्त ही जमीन बेचता है।घर में शादी अथवा बीमारी की स्थिति में अंतिम आस जमीन ही होती है जिसे बेचकर किसान अपना जीवन रक्षण तथा जिम्मेदारी निभाता है लेकिन राज्य सरकार के इस तुगलकी फरमान से संपत्ती होते हूए भी किसान अपना जीवन रक्षण नहीं कर सकता है।




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