
- रात में घरों व छठ घाटों पर कोसी भरने की परंपरा भी निभाई गई,
- छठ व्रतियों ने घर पहुंच कर अन्न-जल व प्रसाद ग्रहण कर किया पारण
रिपोर्ट : के. के. सिंह सेंगर/वीरेंद्र यादव/वीरेश सिंह,
छपरा/एकमा (सारण) : “उगऽअ हो सूरज देव…!” सहित अन्य पारंपरिक छठ लोक गीतों के सामूहिक सुमधुर स्वर में गायन के बीच रविवार की अहले सुबह छपरा शहर सहित ग्रामीण क्षेत्र के विभिन्न छठ घाटों पर उगते हुए सूर्यदेव को छठ व्रतियों की ओर से अर्घ्य सामग्री अर्पित करने के साथ ही चार दिवसीय लोक महापर्व चैती छठ का समापन हो गया।
इस दौरान छठ व्रतियों की ओर से सूर्य देवता एवं छठी माता से छठ व्रतियों ने अपने परिवार के लिए निरोगी काया, अन्न- धन, उन्नति, सफलता सहित सुख-समृद्धि की कामना की गई।
छपरा शहर स्थित राजेंद्र सरोवर, भगवान बाजार, धर्मनाथ मंदिर परिसर के अलावा विभिन्न मोहल्लों में पोखरा, तालाबों सहित मांझी के सरयु नदी के रामघाट, मधेश्वर घाट तट, बैरिया घाट के अलावा एकमा के गंजपर तालाब, भरहोपुर के पोखरा, नचाप गांव के बोहटा नदी के तट, मोन जलाशय, डोरीगंज के सूर्य मंदिर परिसर व नदी के तट, दिघवारा, मसरख, मढ़ौरा, आदि स्थानों पर आयोजित छठ पूजा आयोजन स्थलों पर श्रद्धालुओं का भारी जनसैलाब उमड़ा। सभी जगहों पर छठ व्रतियों ने रविवार की अहले सुबह पारंपरिक तरीके से उदयीयमान भगवान भास्कर को श्रद्धापूर्वक अर्घ्य अर्पित किया गया।
घर लौटकर छठ व्रतियों की ओर से छठ पूजा का प्रसाद स्वयं एवं परिजनों को ग्रहण कराने के साथ ही पारण की रस्म पूरी हो गई। इस प्रकार छठ पूजा का पारंपरिक तरीके से समापन हो गया।

नगर पंचायत एकमा बाजार के प्रखंड मुख्यालय स्थित शिव मंदिर परिसर स्थित कृत्रिम छठ घाट जलाशय पर छठ व्रती शिक्षिका हिमाद्रि कुमारी, देवंती देवी, रंजु देवी, अनिता देवी, संध्या देवी, मंजू देवी, अंजू देवी, देवन्ति देवी, शांति देवी, मीरा देवी, लालझरी देवी, रीता देवी, सुनीता देवी, अनिता देवी, सरस्वती देवी और राजापुर में तालाब स्थित छठ घाट पर सुगांति देवी, किस्मती देवी ने उदयीयमान सूर्यदेव को अर्घ्यं अर्पित किया। पश्चिमी रेलवे क्रॉसिंग के समीप स्थित पोखरा तट, भटटोली, गंजपर पोखरा व आसपास के इलाकों में
रविवार की सुबह भी उदीयमान/ उगते हुए भगवान भास्कर को अर्घ्य देने व व्रतियों की ओर से पारण करने की रस्म अदायगी के साथ इस चार दिवसीय लोक आस्था के महापर्व चैती छठ का पारंपरिक ढ़ंग से समापन हुआ। राजापुर, हंसराजपुर, रीठ, हरपुर, नरहनी, नवतन, नचाप, भजौना, सिंगही, टेघरा, नरवन, महम्मदपुर आदि गांवों के छठ घाटों पर छठ व्रतियों ने शुक्रवार को प्रातः काल पूरब दिशा में जैसे ही आसमान में सूर्योदय की लालिमा दिखाई दी। अर्घ्य सामग्रियों को लेकर विभिन्न जलाशयों के बीच खड़े होकर भगवान भास्कर को अर्घ्य अर्पित करने का सिलसिला शुरु हो गया। बांस व पीतल की बनी सूप में अर्घ्य सामग्रियों को रखकर श्रद्धापूर्वक छठ व्रतियों ने उदयीमान भगवान भास्कर को श्रद्धापूर्वक अर्घ्य अर्पित किया गया। इसी प्रकार मांझी, ताजपुर मुबारकपुर, एकडेंगवा, गोबरही, साधपुर, शीतलपुर, बरेजा, भरहोपुर, सरयुपार, गौसपुर, देकुली, गंजपर, खानपुर, भलुंआ बुजुर्ग, बिगहा, महुंई, आदि सभी गांवों में छठ व्रतियों की ओर से पारंपरिक तरीके से पारंपरिक व कृत्रिम छठ घाटों के किनारे चार दिवसीय छठ व्रत का समापन हो गया।
इस बीच बनियापुर प्रखंड के हरपुर कराह पंचायत के छठ घाट पर विशेष आयोजन पत्रकार राकेश कुमार सिंह की अगुवाई में आयोजित हुआ। यहां काशी के बटुकों ने विधि-विधान से गंगा आरती की प्रस्तुति किया। सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित हुआ। सजावट आदि भी आकर्षण का केंद्र रहा। वहीं कोठेयां नरांव के सूर्य मंदिर में भी श्रद्धालुओं ने विशेष पूजा अर्चना किया।
बताते चलें कि गुरुवार को नहाय-खाय के साथ चार दिवसीय छठ व्रत का अनुष्ठान शुरू हुआ था। दूसरे दिन शुक्रवार को छठ व्रतियों ने दिन भर उपवास रहकर शाम को खरना का अनुष्ठान पूरा किया। तीसरे दिन शनिवार की शाम अस्ताचलगामी भगवान भास्कर को विभिन्न छठ घाटों पर श्रद्धापूर्वक अर्घ्य अर्पित किया गया। रात को ग्रामीण क्षेत्रों में छठ व्रतियों की ओर से कोसी भरने की परंपरा निभाई गई। इस बीच सामूहिक स्वर में छठी माता और सूर्य देवता के पारंपरिक क्षेत्रीय लोक गीतों के गायन से पूरा माहौल छठमय हो गया।
छठ पर्व की पूजन सामग्रियों में यह शामिल रहा :

एकमा (सारण) : एकमा के छठ घाट पर श्रद्धालु महिला रूचि सिंह सेंगर ने बताया कि छठ की पूजा में एक-एक विधि-विधान को विशेष महत्व दिया जाता है। इन विधि-विधानों में पूजन सामग्री का भी विशेष महत्व है। इन सभी छठ पूजन सामग्रियों के बिना छठ व्रत को अधूरा माना जाता है। उन सभी की छठ पूजा के लिए छठ व्रतियों एवं उनके परिजनों की ओर से क्षेत्रीय एवं नगर पंचायत बाजारों में पहुंचकर खरीददारी की गई।
छठ व्रती रंजु तिवारी ने बताया कि बांस या पीतल की सूप (सूपा), बांस की कोईन/फट्टे से बने दउरा, डलिया व डगरा, पानी वाला नारियल, गन्ना पत्तियों लगी हुई, सुथनी, शकरकंदी, कच्ची हल्दी, अदरक का पौधा हरा हो तो अच्छा, नाशपाती, नींबू बड़ा, गागल, शहद की डिब्बी, पान, साबूत सुपारी, कैराव, सिंदूर, कपूर, कुमकुम, चावल (अक्षत के लिए), चन्दन, मिठाई, पम प्याला, आदि के अलावा घर में बने हुए पारंपरिक पकवान जैसे : ठेकुवा, खस्ता, कसार, टिकरी आदि छठ पूजन की सामग्रियों में शामिल रहा है।
सामूहिक स्वर में महिलाओं ने किया छठ गीतों का गायन :
एकमा/मांझी : लोक आस्था का पर्व छठ पर्व के पावन अवसर पर नचाप गांव स्थित राम जानकी व काली माता मंदिर परिसर में महिलाओं की ओर से सामूहिक स्वर में विभिन्न वाद्य यंत्रों के साथ छठ पूजा के पारंपरिक गीतों का गायन किया गया।
केरवा के पात पर उगेलअ सूरजमल .., कांच ही बांस के बहंगिया बहंगी लचकत जाय ….। आदि पारंपरिक छठ लोकगीतों को सामूहिक स्वरों में महिलाओं की ओर से सामूहिक रूप से गायन के बाद पूरा माहौल छठमय नजर आया।




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