आस्था : रामयादि बाबा के मंदिर में प्रतिवर्ष की भांति नागपंचमी की पूजन आज

#चमत्कारी पिंडी पर दूध-लावा चढ़ाने दूर-दूर से आते हैं लोग

मांझी(सारण)। सुनकर आपको आश्चर्य होगा लेकिन सच्चाई यही है कि बगैर झाड़ फूंक और दवा दारू के सर्पदंश से पीड़ित मरीज यहां से चंगा होकर लौटते हैं। मांझी प्रखंड मुख्यालय से तीन किमी उत्तर रामयादि बाबा के मंदिर में बनी पिंडी की मिट्टी चख लेने पर विष का उतर जाना किसी चमत्कार से कम नही है। प्रतिवर्ष नाग पंचमी के दिन उक्त मन्दिर परिसर में मेला लगता है।

इस वैज्ञानिक युग के इस चमत्कार के साथ एक और किवदंती जुड़ी है कि नाग पंचमी को प्रतिवर्ष वर्षा भी सुनिश्चित है। लगभग दो सौ वर्षों पूर्व राम यादि बाबा से जुड़ी घटना का जिक्र करते हुए उनकी पांचवीं पीढ़ी के बुजुर्ग पूर्व सैनिक चन्द्रिका भट्ट इसे ईश्वरीय वरदान मानते हैं। उन्होंने बताया कि उनके दादा प्रताप भट्ट रामयादि भट्ट तथा रक्षा भट्ट तीन भाई थे। झोंपड़ी से भूषा निकालने के क्रम में रामयादि भट्ट की अकाल मौत हो गई। मौत के कुछ ही दिनों बाद परिजनों को स्वप्न आया कि उनको सांप का काटना जादू टोना का कारनामा है। उन्होंने स्वप्न में बताया कि मैंने जो बटबृक्ष लगाया है उसके समीप मिट्टी की पिंडी बनाकर उसे मन्दिर का शक्ल दें तथा नागपंचमी को दूध और लावा से पूजन करें। उन्होंने स्वप्न में ही बताया कि मंदिर में स्थापित पिंडी चख लेने वाला सर्प दंश से पीड़ित ब्यक्ति काल के ग्रास का शिकार नही हो सकेगा। मरीज के साथ शर्त यह लगा दी कि दवा दारू व झाड़ फूंक कराने वाले पर आशीर्वाद का प्रभाव नही होगा। ग्रामीण पृथ्वी तिवारी कमलेश शर्मा तथा ललिता तिवारी ने बताया कि शुद्ध अंतःकरण से आने वाला मरीज आज तक कभी मौत का शिकार नही हुआ।

मेला के पूर्व मन्दिर परिसर में रामचरित मानस का अखण्ड सस्वर पाठ रविवार से जारी है। उधर मेले में दुकान लगाने में दुकानदार मशगूल थे। मेले में चरखी झूला लगाने की होड़ सी लगी थी। ग्रामीणों ने बताया कि मेला के दिन सारण प्रमंडल के अलावा पूर्वी उत्तर प्रदेश से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु दूध व लावा चढ़ाने आते हैं। स्थानीय प्रशासन द्वारा मेला में शांति ब्यवस्था बनाये रखने के लिए पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं।