आवासित प्रवासी मजदूर की मौत के बाद प्रशासन पर लोगों में गुस्सा
इसुआपुर(सरन)। टेढ़ा गांव के क्वारंटाइन प्रवासी मजदूर तारकेश्वर महतो की बीती रात मौत हो जाने के बाद रविवार को परिजनों तथा ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा है। लोगों का कहना है कि दिल्ली से आने के बाद बदइंतजामी के बीच उसे मध्य विद्यालय टेढ़ा स्थित कवांटराइन सेंटर पर रखा गया। वहीं तबीयत बिगड़ने पर कोई समुचित इलाज नहीं हुआ। उल्टे रोगी को एक्सपायरी दवा दे दी गई। जिसके बाद शुक्रवार की शाम को तबीयत अधिक बिगड़ जाने की सूचना पर लगभग 12 घंटे बाद शनिवार को दिन के लगभग एक बजे सदर अस्पताल छपरा से एंबुलेंस तो आई लेकिन चकहन गांव से अन्य संक्रमित लोगों को बिठाते हुए तीन घंटे बाद सदर अस्पताल छपरा पहुंची। जहां तारकेश्वर महतो का कोई समुचित इलाज नहीं हुआ। वहीं एकाएक शनिवार की रात छपरा से एंबुलेंस आई तथा परिजनों को यह कह कर ले गई कि तारकेश्वर महतो की मृत्यु हो गई है। वहीं परिजनों का आरोप है कि मृतक का बिना पोस्टमार्टम किए शव को जलाने के लिए रिवीलगंज घाट पर ले जाया गया। जहां उन्हें बेसहारा छोड़कर एंबुलेंस चली गई। जबकि शव को जलाने के लिए तथा घर वापस आने के लिए परिजनों के पास रुपए नहीं थे। जिसकी सूचना मिलने पर स्थानीय मुखिया पति राम प्रकाश दास में श्मशान घाट स्थित एक लकड़ी दुकानदार के खाते में तीन हजार रुपए भेजें। तब जाकर परिजनों ने लाश को दफनाया
प्रशासन के इस रवैया से नाराज परिजनों तथा ग्रामीणों में आक्रोश है। वहीं कोरोनावायरस से संक्रमित होने की आशंका को लेकर भी गांव में भय व दहशत बना हुआ है। भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश सचिव स्थानीय जिला पार्षद प्रियंका सिंह, धीरज सिंह, मुखिया पति राम प्रकाश दास, जदयू के प्रखंड अध्यक्ष छविनाथ सिंह, पन्नालाल राय, संजीव सिंह समेत दर्जनों लोगों ने प्रशासनिक बंदइंतजामी को लेकर आक्रोश व्यक्त किया है। साथ ही मौत के मामले की जांच की भी मांग की है।