अपान मुद्रा में सभी प्राणायाम करने से ब्रह्मचर्य रक्षा में सहायता मिलती है:गोविन्द जी महाराज

#रिपोर्ट -सुरभि तिवारी /तरैया
तरैया (सारण):08अप्रैल 2018
वाईडीबीएस कॉलेज परिसर में आयोजित संगीतमय भागवत कथा एवम योग विज्ञान शिविर के आठवें दिन संत गोविंद जी महाराज ने सुबह के योग सत्र में ब्रह्मचर्य की रक्षा हेतु विशेष आसन प्राणायाम सिखाये। महाराज जी ने कहा कि अपान मुद्रा में सभी प्राणायाम करने से ब्रह्मचर्य रक्षा में सहायता मिलती हैं साथ ही ब्रह्मचर्य की रक्षा हेतु नियमित गौमुखासन,सर्वांगासन,शीर्षासन, वज्रासन ,हलासन जानुशिरासन ,ताड़ासन आदि आसनों का अभ्यास करने से ब्रह्मचर्य रक्षा में विशेष लाभ मिलता है साथ ही बच्चों की लंबाई भी बढ़ती है। अतः ब्रह्मचर्य की रक्षा के लिए नियमित गौमुखासन का अभ्यास करना चाहिये ।इस अवसर पर संत गोविंद जी महाराज ने कहा कि योग ,आयुर्वेद,एवं आध्यात्म को पाठ्यक्रम में शामिल करना चाहिये। जिससे हमारे देश के युवा ,हमारी भारतीय संस्कृति को बल मिलेगा ।साथ योग शिक्षक के रूप में युवाओं को रोजगार भी मिलेगा।
संगीतमय भागवत कथा के दौरान संत गोविन्द जी महाराज ने श्री कृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए सखियो के संग हंसी ठिठोली ,एवं लड़ाई झगड़े का वर्णन करते हुए मधुर संगीत गोकुल के कृष्ण कन्हिया सखी हमसे झगड़ा मवह झगड़ा मचायो जी बहुत ही सुंदर भजन पर उपस्तिथ भक्तो को क्या खूब रिझाया ।गोविंद जी महाराज ने कथा के दौरान पूतना वध ,संकट भंजन ,तृणावर्त उद्धार,नाम संस्कार , यमलार्जुन उद्धार ,और गोकुल से वृन्दावन की यात्रा तक कथा सुनाई ।इस अवसर पर महाराज जी ने नाम संस्कार का वर्णन करते हुए कहा कि कृष धातु का” सत”अर्थ है और कृष के परे जो ‘ ण ‘-कार है उसका अर्थ आनंद होता है ।सत व आनंद के योग में चित्त भी नित्य है। इसलिए ‘कृष्ण’ शब्द सच्चिदानंद लक्षण युक्त है।इसलिए प्रत्येक मानवात्मा के सम्पूर्ण कर्मबन्धनों को काटने वाले श्री कृष्ण मन्त्र की दीक्षा ग्रहण करना चाहिये क्योंकि यही परात्पर मन्त्र सभी अर्थात सात करोड़ मन्त्रो का सार हैं।सोते जगते प्रत्येक समय मे कृष्ण कृष्ण जपने वाले अपने सम्पूर्ण पाप राशि को भष्म कर पवित्र आत्मा बन जाते हैं। और अंत समय मे श्री कृष्ण के परमधाम को प्राप्त कर शास्वत शांति को प्राप्त कर लेते हैं।