अपनी बारी का इंतजार कीजिए

मैं आप ही का मसला हूँ,
मुझ को सोचिये,
कि मेरा हल निकले..
भागिए मत
मुंह छुपाने से कुछ नही होगा
सोचिए तो सही
सच बोलने से
डर क्यूं रहे हैं
ऐसे कैसे होगा
मेरा दुःख आपका दुःख नही है
हल नही निकलेगा तो
यह मत समझिए कि
केवल मैं ही बर्बाद होऊंगा
मुझे तो जो होना होगा
वह तो होके ही रहेगा
तब अपने बारे में सोचियेगा
कि अब आपका क्या होगा
अभी भी समय है
सोचिए,हल निकालिये,सच बोलिये
गलत का विरोध करिये
नहीं तो अपनी बारी का इंतजार करिये
@ साहित्यकार संजय कुमार सुमन