हिंदी साहित्य में काव्य रस का एक अलग ही महत्व है ।जिसमें छंद और रस की प्रधानता होती है ।कविता रस के साथ अंतर आत्माओं को छूने का काम करती है ।जो सरस और कर्णप्रिय होती है। कविता कवियों का अंतर आत्माओं द्वारा उत्पन्न तरंग की उत्पत्ति होती है ।आज कविताओं में नई विधाएं जुटती हुई नजर आ रही है। कालजई रचनाओं को वर्तमान के कवियों ने गद्य रचना को भी जोड़ने का सतत प्रयास किया है।
प्रस्तुत है :-रेशमा रानी, बेगूसराय बलिया मध्य विद्यालय की शिक्षिका
प्रस्तुतकर्ता :-कुंजबिहारी शास्त्री ” दैनिक खोज खबर “जिला संवाददाता, मधेपुरा
संकलन :-नौशाद आलम संवाददाता, मधेपुरा
शीर्षक :-🔴🔴 माँ मैं भी पढ़ने जाऊँगी 🔴🔴
माँ अब तो मेरी अर्जी सुन लो
इस बिटिया की मर्जी सुन लो
मैं बार- बार दोहराऊँगी
कि हाथ पकड़ कर भैया के संग
माँ मैं भी पढ़ने जाऊँगी ।
अब खेल कूद में जी नहीं लगता
दिन भी मेरा अब नहीं है ढ़लता
मुझ पर यह एहसान करो
मैं जीवन भर गुण गाऊँगी
कि हाथ पकड़ कर भैया के संग
माँ मैं भी पढ़ने जाऊँगी ।
कपड़े सारे धोकर तेरे
मैं सारे बर्तन माँजूगी
घर के सारे कामों में भी
मैं तेरा हाथ बटाऊँगी
कि हाथ पकड़ कर भैया के संग
माँ मैं भी पढ़ने जाऊँगी ।
सबका ध्यान रखूँगी हरदम
हर कहना तेरा मानूँगी
छोटू , बंटी , गुड़िया , चिंटु
मैं सब पर जान लुटाऊँगी
कि हाथ पकड़ कर भैया के संग
माँ मैं भी पढ़ने जाऊँगी ।
पढ़ती है सब सखी सहेली
रह गई बिल्कुल मैं ही अकेली
हरिया, मुन्नी, फुलवा, रामू
सबके सब स्कूल चले हैं
टुक- टुक देखूँ उनको जाते
सोचूँ कैसे तुझे मनाऊँगी
कि हाथ पकड़ कर भैया के संग
माँ मैं भी पढ़ने जाऊँगी ।
लाछी दीदी को बचपन में ब्याह
दिया सर से अपने बोझ उतार
छीन के सारे खेल- खिलौने
कर गई जीवन से खिलवाड़
अब खुद का व बहनों का जीवन
इस बाल विवाह से बचाऊँगी
कि हाथ पकड़ कर भैया के संग
माँ मैं भी पढ़ने जाऊँगी ।
मैं दहेज रूपी दानव पर भी
शिक्षा का अस्त्र चलाऊँगी
माँ दहेज नहीं फिर देना होगा
जो पढ़ लिख कुछ बन जाऊँगी
कि हाथ पकड़ कर भैया के संग
माँ मैं भी पढ़ने जाऊँगी ।
सरकारी स्कूल शिक्षा का है
कई योजनाएँ इसके अंदर हैं
मुफ्त पोशाकें, मुफ्त किताबें
मध्याह्न भोजन और छात्रवृत्ति भी
इन सबका लाभ उठा कर माँ
मैं मुफ्त में शिक्षा पाऊँगी
कि हाथ पकड़ कर भैया के संग
माँ मैं भी पढ़ने जाऊँगी ।
मेरी विनती मेरी अर्जी
अब तो माँ स्वीकार करो
विद्यालय जाने का यह सपना
अब तो माँ साकार करो
अपनी किस्मत मैं खुद ही लिखूँगी
मैं जग में नाम कमाऊँगी
कि हाथ पकड़ कर भैया के संग
माँ मैं भी पढ़ने जाऊँगी ।
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ
शिक्षा का दीप हर घर में जलाओ
पढ़ेंगी बेटी तभी तो बढ़ेंगी बेटी
सरकार के हर इस नारे को
मैं सच कर के दिखलाऊँगी
कि हाथ पकड़ कर भैया के संग
माँ मैं भी पढ़ने जाऊँगी
माँ मैं भी पढ़ने जाऊँगी ।

✍✍ रेशमा रानी
म.वि.बलिया , बेगूसराय




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