साहित्य में कविताओं का एक अलग ही महत्व है । जिसमें छंद और लय की समावेश पाई जाती है ।कभी लेखक गायन के माध्यम से भी प्रस्तुति करते हैं। जिसमें तुकबंदी का अधिक महत्व देखा जाता है ।कविता विधा में दिन प्रतिदिन नई शोध होती रहती है ।इसी क्रम में आज प्रस्तुत है :–
✒✒डॉ जियाउर रहमान जाफरी साहब की कविता
 

प्रस्तुतकर्ता:- कुंजबिहारी शास्त्री” दैनिक खोज खबर “मधेपुरा।

  • 🔴🔴शीर्षक :- शाम भी जलाती है

मुश्किलों का सफर भी लगता है….
घर से निकलें तो डर भी लगता है..
माँ मेरी घर में जब नहीं होती…
कितना सुनसान घर भी लगता है…
ये जमीं ही हमें नहीं प्यारी…  
दिल मेरा चाँद पर भी लगता है…
तुमने देखा जो इस तरह मुझको..
अब कहाँ ये जिगर भी लगता है…
कुछ तो जिद भी थी मर ही जाने की…
कुछ ज़हर का असर भी लगता है..
सुरमई शाम भी जलाती है…
धूप में दोपहर भी लगता है..
वक्त लगता नहीं बिगड़ने में..
बेहतरी में हुनर भी लगता है…
                 

परिचय


डॉ जियाउर रहमान जाफरी 
हिन्दी से पीएचडी  और एम॰ एड 
-हिन्दी उर्दू और मैथिली के जाने पहचाने शायर और आलोचक 

प्रकाशित कृति 


1-खुले दरीचे की खुशबू…हिन्दी ग़ज़ल 
2-खुशबू छू कर आई है…हिन्दी ग़ज़ल 
3-परवीन शाकिर की शायरी..आलोचना 
4-चाँद हमारी मुट्ठी में है…बाल कविता 
5-लड़की तब हँसती है…सम्पादन 
-राजभाषा विभाग और आपदा प्रबंधन पुरुस्कार प्राप्त 
-निवास स्थान…मुजफ़्फ़रा बेगूसराय 
-सम्प्रति..बिहारशरीफ में सरकारी सेवा और सम्पादन