अन्त.मातृभाषा दिवस के अवसर पर जामिया में बहुभाषी कवि गोष्ठीएवं कहानी पाठ

#लालबिहारी लाल

नई दिल्लीअन्त. मातृभाषा दिवस के अवसर पर जामिया के राजभाषाहिंदी प्रकोष्ठ द्वारा बहुभाषी कवि गोष्ठी एवं कहानी पाठ का आयोजन किया गया जिसकी अध्यक्षताप्रो. हेमलता महिश्वर

अन्त. मातृभाषा दिवस के अवसर पर जामिया के राजभाषाहिंदी प्रकोष्ठ द्वारा बहुभाषी कवि गोष्ठी एवं कहानी पाठ का आयोजन किया गया जिसकी अध्यक्षताप्रो. हेमलता महिश्वर,अध्यक्ष, हिंदी विभाग ने की। कार्यक्रमके विशिष्ट अतिथि प्रो. गिरिश चंद्र पंत, अध्यक्ष, संस्कृत विभाग रहे। जामिया के विभिन्न विद्यार्थियों, संकाय सदस्यों और प्रशासनिक कर्मचारियों द्वारा हिंदी,संस्कृत, ओड़िया, मलयालम, ब्रजभाषा, छत्तीसगढ़ी, भोजपुरी, उर्दू और अंग्रेजी में रचनाएं प्रस्तुत की गईं। कार्यक्रम केदौरान हिंदी भाषा में जहाँ डॉ. मुकेश कुमार मिरोठा, अपर्णा दीक्षित, आदिल अली,मुकुल सिंह चैहान, अदनान कफ़ील दरवेश नेअपनी कविताएं प्रस्तुत कीं वहीं शुभम पांडे ने हिंदी कहानी सुनाई। डॉ. सरोज महानंदाने ओड़िया, डॉ. सत्यप्रकाश प्रसाद ने अंग्रेज़ी, शीला प्रकाश ने मलयालम, डॉ. धनंजय मणि त्रिपाठी ने संस्कृत, डॉ. यशपाल ने ब्रजभाषा में अपनी सस्वर कविताओं से सबका मन मोहलिया वहीं सुरैया खातून ने उर्दू गज़ल पेशकर अलग ही समा बाँधा और सना परवीन ने उर्दूकहानी से सबको मंत्रमुग्ध किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं हिंदी विभागाध्यक्षप्रो. हेमलता महिश्वर ने छत्तीसगढ़ की मधुर भाषा छत्तीसगढ़ी में सस्वर गीत प्रस्तुत किए।

कार्यक्रम के संयोजक डॉ. राजेश कुमार माँझी, हिंदीअधिकारी ने अपनी भोजपुरी कविताओं और अंग्रेज़ी में अनुदित कविताओं का पाठ किया। डॉ.यशपाल ने कार्यक्रम को बहुत ही कुशलतापूर्वक संचालित किया। कार्यक्रम को आयोजित करनेऔर इसे सफल बनाने में श्री नदीम अख़्तर, हरी नारायण, आदिल अली और वक़ार अहमद की अहम भूमिका रही। श्री इक़बाल अहमद हकीमने अतिथियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। डॉ. भारत भूषण, रणवीर सिंह, श्रुति मल्होत्रा, फरहा जै़दी, जैब फरहान बानो, रोशन कासिम आदि प्रशासनिक कर्मियोंने भी प्रत्यक्ष व परोक्ष रूप से कार्यक्रम को सफल बनाने में अपना-अपना महत्त्वपूर्णयोगदान दिया। यह कार्यक्रम इसलिए पूरी तरह सफल रहा चूंकि इसमें छात्रों का खासा उत्साहदेखने को मिला। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि प्रो. गिरिश चंद्र पंत, अध्यक्ष, संस्कृत विभाग की सभीप्रतिभागियों को समर्पित संस्कृत की आशु-कविता ने विशेष रोमांचित किया।