झूठे मुकदमे वापस लेकर पत्रकारों को कोरोना वारियर्स सम्मान देने की उठी मांग


 
 
छपरा: अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति के राष्ट्रीय कार्यकारणी की जूम एप पर ऑनलाइन हुई बैठक में पत्रकार सुरक्षा कानून लागू कराने एवं कोरोना काल मे कई राज्य सरकार द्वारा पत्रकारों के साथ दमनात्मक कार्रवाई को लेकर गहन मंथन हुआ।  बैठक में दिल्ली, गुजरात, मध्यप्रदेश,  उत्तरप्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, झारखंड, महाराष्ट्र, उत्तराखंड के राष्ट्रीय व प्रदेश पदधिकारियो ने हिस्सा लिया। राष्ट्रीय अध्यक्ष जिग्नेश भाई कलवाडिया की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई बैठक में सभी ने संगठन के मूल मंत्र ‘ पत्रकार सुरक्षा कानून ‘ लागू कराने संगठन के सशक्तिकरण , फेसबुक , ट्विटर एवं सोशल मीडिया के माध्यम से संगठन के क्रियाकलापो से शहर से लेकर मुफ्फसिल तक के साथियो को जोड़ने , सदस्यता अभियान शीघ्र पूरा करने जैसे मुद्दों पर आम सहमति बनी।
बैठक में वैश्विक महामारी कोरोना त्रासदी में पत्रकारों के दयनीय हालात पर चर्चा हुई। सरकार से मांग की गई कि कई राज्यो में कोरोना काल मे समाचार संकलन को लेकर पत्रकारों पर किए गए फर्जी मुकदमे शीघ्र वापस लिए जाए। पत्रकारों के प्रति सरकारी तंत्र के दमनात्मक कार्रवाई की तीव्र भर्त्सना की गई ।  अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष जिग्नेश भाई कलवाड़ीया ने अपने सम्बोधन में  कहा कि कोरोना संक्रमण काल से पूरी दुनिया में हाहाकार मचा हुआ है। संक्रमण काल के दौरान चिकित्सक, पुलिसकर्मी, पत्रकार साथी अग्रिम पंक्ति में खड़े होकर अपनी जान दांव पर लगाकर जनसेवा कर रहे हैं। जिनमें सबसे ज्यादा जोखिम पत्रकारों को उठाना पड़ रहा है। संस्थानों से मामूली मानदेय पाने वाले पत्रकारों के घरों में फांके पड़ रहे हैं। बावजूद इसके पत्रकारों को निशाने में लेकर उनके ऊपर मुकदमें दर्ज करके प्रताड़ित करना अत्यंत निंदनीय कृत्य है। बैठक के दौरान विनोद दुआ के ऊपर कायम किये गये मुकदमें को लेकर भी गहरा आक्रोश व्यक्त किया गया। अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति ने विनोद दुआ पर दर्ज हुए फर्जी मुकदमें को लेकर देशव्यापी आंदोलन चलाने की चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को देश के सभी पत्रकारों को कोरोना वारियर्स घोषित कर सम्मानित करने की घोषणा शीघ्र करना चाहिए। राष्ट्रीय संगठन महासचिव राकेश सिंह परिहार ने पत्रकार सुरक्षा विधेयक बिल को पास कराने पर जोर देते हुए कहा कि जब तक देश में पत्रकार सुरक्षा कानून लागू नहीं होगा पत्रकारों का इसी तरह उत्पीड़न होता रहेगा। पत्रकारों को सुरक्षा देने के लिए सरकार को ठोस कदम उठाने होंगे। अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति का संकल्प दोहराते हुए श्री परिहार ने कहा कि अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति संकल्पित होकर सम्पूर्ण भारत में सुरक्षा कानून को लागू कराने के लिए जनजागरण अभियान चलायेगी।इस दौरान राष्ट्रीय संगठन महासचिव महफूज खान ने कहा कि अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति का मूल उद्देश्य ही पत्रकारों की सुरक्षा के लिए पत्रकार सुरक्षा कानून का गठन करवाना ही है और इसके लिए संगठन लगातार प्रयासरत है और सम्पूर्ण भारत में इसके लिए संघर्षरत भी है इसी के साथ छत्तीसगढ़ में संगठन ने कानून का ड्राफ्ट तैयार किया था उसे सरकार को सौंप दिया गया है और इस सरकार से विस्तार पर चर्चा भी हो चुकी है और जो लगातार खबर संकलन के दौरान पत्रकारों के साथ दुर्व्यवहार करने या शासकीय कार्य बाधा डालने के लिए उन पर जो अपराध दर्ज किया जा रहा है वह अशोभनीय है इसकी घोर भर्त्सना करते है और सरकार से माँग करते है कि पत्रकार सुरक्षा कानून अधिनियम सम्पूर्ण देश में लागू किया जाए।
 
इस दौरान राष्ट्रीय महासचिव सैय्यद खालिद कैस ने कहा कि कोरोना काल में देश भर में छोटे बड़े सभी पत्रकारों के खिलाफ़ सच उजागर के कारण की गई कानूनी कारवाई निंदनीय है । लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ पर हो रहे प्रहार यह साबित करते हैँ कि वर्तमान समय में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अघोषित आपातकाल लगा दिया गया है। राष्ट्रीय महासचिव रत्नाकर त्रिपाठी ने   भारत में पत्रकारों के ऊपर बढ़ रहे हमलों को लेकर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पत्रकारों को एक जुट होकर पत्रकार सुरक्षा कानून लागू कराने के लिए जिम्मेदार सरकार को उसकी जिम्मेदारी का अहसास कराना चाहिए। अब तक तमाम सरकारों ने पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाये हैं। यदि सरकार पत्रकारों की समस्या को नज़रंदाज़ ऐसे ही करती रही तो  पूरे देश में अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति उग्र आंदोलन की रूपरेखा तैयार करेगा।
 
बैठक में डॉ विद्याभूषण श्रीवास्तव , राष्ट्रीय प्रवक्ता मनोज कुमार सिंह, छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष गोविन्द शर्मा, झारखंड के अध्यक्ष सर्वेश तिवारी, बिहार के संयोजक संजय कुमार सिंह, कर्नाटक के अमन पठान ने अपने महत्वपूर्ण सुझाव रखे जिसे विषयसूची में सर्वसम्मति से सहमति के साथ स्वीकार किया गया।