सीबीएसई तय करें कि स्कूल किताब, कॉपी और यूनिफॉर्म नहीं बेचें- हाई कोर्ट
तासीम अहमद
नई दिल्ली 2 मई। हाईकोर्ट ने सीबीएसई (सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकंडरी एजुकेशन) से कहा है कि वह यह तय करे कि उससे जुड़े स्कूल कॉमर्शियल एक्टिविटीज में शामिल न हों। एक्टिंग चीफ जस्टिस गीता मित्तल और जस्टिस अनु मल्होत्रा की बेंच ने मंगलवार को साफतौर पर कहा, “बोर्ड ये देखे कि स्कूल्स अपने कैम्पस में किताब, कॉपी और यूनिफॉर्म न बेच सकें।” बता दें कि सीबीएसई ने हाल ही में इस बारे में स्कूलों को एक सर्कुलर जारी कर ऐसा करने से मना किया था। हाईकोर्ट ने सीबीएसई की तरफ से जारी सर्कुलर को अपनी नोटिस में लेते हुए कहा, “हम सीबीएसई को इस निर्देश के साथ रिट पिटीशन का निपटारा कर रहे हैं कि वह यह तय करेगी कि उसके सुर्कलर का स्कूलों द्वारा कानून के मुताबिक सख्ती से पालन किया जाएगा।”
बेंच ने यह टिप्पणी बोर्ड की तरफ से पेश वकील के उस तर्क के बाद की, जिसमें उन्होंने कहा कि इस मामले में 19 अप्रैल को एक सर्कुलर जारी किया गया था।
सोशल वर्कर सुनील पोखरियाल ने इस मामले में PIL दायर की थी, जिस पर हाईकोर्ट ने मंगलवार को सुनवाई की।
PIL में क्या कहा गया था
पिटिशनर ने मांग की थी कि कोर्ट स्कूलों को आदेश दे कि वे अपनी इमारत का इस्तेमाल कॉमर्शियल एक्टिविटीज जैसे किताबें और यूनिफॉर्म्स बेचने में न करें। इस पिटीशन का cbse ने यह कहते हुए विरोध किया कि ये जनता के हित में नहीं है। इसमें पिटिशनर का खुद का हित है।
ये जनता के हित का मामला: HC
बोर्ड के वकील की इस दलील पर हाईकोर्ट बेंच ने कहा, “पिटिशनर का अपना हित हो सकता है, लेकिन हम इसे जनता के हित में देख रहे हैं, खासकर स्कूल जाने वाले बच्चों और उनके मां-बाप के हित में।”
बोर्ड ने सर्कुलर में क्या कहा था
सीबीएसई ने 19 अप्रैल को अपने से जुड़े स्कूलों को एक सर्कुलर जारी किया था। उसमें बोर्ड ने कहा था कि स्कूल किताब, कॉपी, ड्रेस और बैग बेचने का धंधा न करें। अगर उन्होंने ऐसा किया तो यह नॉर्म्स का वॉयलेशन होगा। बोर्ड ने ये एडवाइजरी पैरेंट्स की तरफ से शिकायत मिलने के बाद जारी की थी।




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