सांची विश्वविद्यालय में पांडुलिपि शास्त्र, लिपि विज्ञान पर 7 दिवसीय कार्यशाला संपन्न

 नसीम अली रायसेन मध्यप्रदेश

“दैनिक खोज खबर” रायसेन 10  मार्च:-प्राचीन लिपियों, ग्रंथों और उस दौर में प्रचलित लिखने के तरीकों को समझने, पढ़ने के तरीकों और ऐतिहासिक दस्तावेजों के अध्ययन पर आधारित ग्रंथ-संधानम कार्यशाला सांची बौद्ध-भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय में सम्पन्न हुई। पांडुलिपि शास्त्र और लिपि शास्त्र में रुचि जागृत करने के उद्देश्य से 3 से 9 मार्च के दौरान आयोजित कार्याशाला का भरपूर लाभ छात्रों एवं शोधार्थियों ने लिया। कार्यशाला में भारतीय पांडुलिपि शास्त्र की विशेषता, लेखन एवं छपाई की तकनीकों, ब्राह्मी लिपि एवं अन्य लिपियों की जानकारी एवं पढ़ने की तकनीकों पर सात दिनों तक अध्ययन, अध्यापन एवं प्रदर्शन किया गया।

 लिपि विज्ञान के प्रायोगिक अध्ययन के लिए कार्यशाला के प्रतिभागियों ने सांची स्तूप का भ्रमण कर स्तूप के स्तंभों पर लिखित भाषा को समझने का प्रयास किया। कोलकाता विश्वविद्यालय की प्रो रत्ना बसु ने छात्रों को स्तूप के तोरण द्वार पर बने चित्रों का पढ़ने का तरीका समझाया। प्रो. रत्ना बसु ने अशोक कालीन, शुंग पाषाण तथा गुप्तकालीन ब्राह्मी लिपि के बारे में व्याख्यान लिए।

 वैदिक विद्वान डॉ सुद्युम्नाचार्य ने अक्षर विज्ञान, लिपि विज्ञान तथा भाषा विज्ञान की भारतीय परंपरा तथा पांडुलिपि संपदा के विषय में शोधार्थियों को बताया। शोधार्थियों ने पांडुलिपियों के प्रकार, पांडुलिपियों में त्रुटियां एवं लिपि विज्ञान की शोध प्रविधियों के बारे में सीखा।