☀बरसात एवं बरसात बाद बढ़ जाता है चिकुनगुनिया का जोखिम

☀सतर्क रहें, नहीं तो बुखार और जोड़ों का दर्द लंबे समय तक कर सकता है परेशान

✍️परमार मीडिया नेटवर्क

सीतामढ़ी/28 सितंबर:बरसात एवं बरसात बाद डेंगूचिकुनगुनिया का जोखिम बढ़ जाता है। जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ रवींद्र कुमार यादव ने बताया कि डेंगू-चिकुनगुनिया एक ही मच्छर के काटने से होता है, फर्क सिर्फ वायरस का है। चिकुनगुनिया के मरीज को बुखार के साथ जोड़ों का दर्द अधिक परेशान करता है। सही से इलाज न कराने पर लंबे समय तक जोड़ों में दर्द रह सकता है, जिससे चलने-फिरने में कठिनाई हो सकती है। डॉ. यादव ने बताया डेंगू-चिकुनगुनिया के मरीजों के इलाज के लिए हर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी ) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में मच्छरदानी लगे दो बेडों की अलग से व्यवस्था कराई गई है। जो सावधानियां डेंगू से बचाव के लिए जरूरी हैं, वही चिकुनगुनिया के साथ भी लागू होती है।

👉समुदाय को जागरूक करने में जुटी हैं आशा :

डॉ. यादव ने बताया डेंगू-चिकुनगुनिया की रोकथाम के लिए वीबीडीसी और केटीएस को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। बताया कि जिले में डेंगू-चिकुनगुनिया की रोकथाम के लिए जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। हर प्रखंड कार्यालय और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में इसके लिए होर्डिंग लगाए गए हैं। सभी पीएचसी प्रभारी को निर्देश दिया गया है कि डेंगू-चिकुनगुनिया की रोकथाम और उसके इलाज के लिए सभी व्यवस्था सुनिश्चित करें। क्षेत्र में आशा और जीविका दीदियों को प्रशिक्षित कर समुदाय को जागरूक करने की मुहिम पर लगाया गया है।

👉आम मच्छरों से अलग होता है एडीज :

डॉ. यादव ने बताया डेंगू-चिकुनगुनिया का मच्छर आम मच्छरों से काफी अलग होता है। जिस मच्छर के काटने से डेंगू-चिकुनगुनिया होता है, उस का नाम है मादा एडीज मच्छर। ये मच्छर अक्सर रोशनी में ही काटते हैं। ये दिन में खासकर सुबह के वक्त काटते हैं। वहीं अगर रात में रोशनी ज्यादा है तो भी ये मच्छर काट सकते हैं। इसलिए सुबह और दिन के वक्त इन मच्छरों से ज्यादा सतर्क रहें। यह मच्छर एक आदमी को काटने से संतुष्ट नहीं होता। यह ग्रुप में कई लोगों को काट लेता है। इसलिए अगर समूह में कोई एक आदमी डेंगू-चिकुनगुनिया से प्रभावित हो जाता है तो आशंका रहती है कि उस समूह के अन्य लोग भी इसकी चपेट में आए होंगे।

👉पानी जमा ना होने दें, उस पर थोड़ा केरोसिन तेल डाल दें :

डॉ. यादव के अनुसार शहरी जीवनशैली की यह बीमारी गांव-कस्बों में भी आ गई है। अब गांव में भी फ्रीज, कूलर, फूल गमले घर-घर में दिख जाएंगे। इन्हीं में जमा हुए पानी में ये मच्छर पनपते हैं। 10 एमएल पानी भी इनके पनपने के लिए प्रयाप्त होता है। अगर इन चीजों में जमा हुए पानी पर थोड़ा केरोसिन तेल डाल देंगे तो उसके ऊपर जमा तेल के सतह के कारण ऑक्सीजन का कनेक्शन टूट जाएगा, जो लार्वा को पनपने नहीं देगा। घर के आसपास के गड्ढों में भी साफ पानी न जमा होने दें।

👉ये लक्षण दिखें तो तुरंत चिकित्सक से लें परामर्श :

डॉ. यादव ने बताया डेंगू-चिकुनगुनिया को हड्डी तोड़ बुखार भी कहते हैं, क्योंकि इसमें सर्दी-खांसी के अलावा बदन दर्द के साथ तेज बुखार रहता है। इसके अलावा आंख के पिछले भाग में दर्द, हथेली में खुजलाहट, शरीर पर चकत्ते उभर आते हैं। अभी के मौसम में डेंगू से बचने के लिए हमेशा फुल बाजू के कपड़े पहनने चाहिए। मच्छरदानी लगाकर ही सोना चाहिए। आसपास हमेशा साफ-सफाई का ध्यान रखना चाहिए। सतर्कता ही डेंगू-चिकुनगुनिया से बचने का बेहतर उपाय है।