सिवान :डस्टबीन घोटाला मामले में तत्कालीन ईओ सहित तीन पर गिरी गाज
#परवेज अख्तर सिवान : नगर परिषद क्षेत्र के गोपालगंज मोड़ स्थित राजेंद्र उद्यान के सौंदर्यीकरण मामले में वित्तीय अनियमितता बरतने
के आरोप में नगर विकास एवं आवास विभाग ने नगर परिषद के तत्कालीन कार्यपालक पदाधिकारी सह वर्तमान में बेगूसराय नगर निगम
के अपर आयुक्त आरके लाल, नगर परिषद के अभियंता ओमप्रकाश सुमन एवं संविदा पर कार्य कर रहे अभियंता अजीत कुमार सिंह के खिलाफ कार्रवाई करने का आदेश दिया है। अपर सचिव ने 11 जनवरी को पत्र के माध्यम से नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी को कनीय अभियंता की संविदा को विधिवत समाप्त करने का आदेश जारी कर दिया है। बता दें कि राजेंद्र उद्यान एवं डस्टबीन खरीद मामले में करीब 10 करोड़ रुपये के घोटाले की जांच के आदेश मिलने
के बाद जिलाधिकारी महेंद्र कुमार ने प्रतिनियुक्त जांच अधिकारी पथ प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता राजकुमार को नगर परिषद में जाकर संबंधित फाइलों को खंगाले का निर्देश दिया था। जांच करने के बाद पथ प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता राजकुमार द्वारा दी गई रिपोर्ट के बाद यह आदेश अवर सचिव शिव प्रसाद राम द्वारा जारी किया गया है। जिसमें तत्कालीन कार्यपालक पदाधिकारी आरके लाल पर प्रपत्र क गठित करने का आदेश नगर आवास विभाग ने सामान्य प्रशासन विभाग को दिया गया है। वही अभियंता ओमप्रकाश सुमन पर प्रपत्र क गठित किया गया है एवं अनियमितता बरतने के कारण संविदा पर बहाल कनीय अभियंता अजीत कुमार सिंह की संविदा अवधि विधिवत प्रक्रिया अपनाते हुए समाप्त करने को कहा गया है। बता दें कि एलईडी और हाइमास्ट लाइट की खरीद में तीन करोड़ 87 लाख रुपये के घोटाले के मामले में निगरानी विभाग की जांच से नगर परिषद उबरा भी नहीं कि डस्टबिन की खरीद में करीब छह करोड़ 90 लाख रुपये का एक और घोटाला सामने आ गया। इसकी जांच जिलाधिकारी महेंद्र कुमार ने पथ निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंता को सौंपी है। इसके साथ ही राजेंद्र उद्यान के सौंदर्यीकरण में भी घोटाला अब सामने आ गया है।
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राजेंद्र उद्यान के सौंदर्यीकरण के लिए 43.56 लाख लेकर भाग गया ठेकेदार
6.52 लाख का ही हुआ काम,
जासं, सिवान : दो करोड़ 27 लाख रुपये की लागत से राजेंद्र उद्यान के सौंदर्यीकरण का काम अभी शुरू भी नहीं कराया गया था कि ठेकेदार को दो बार में 43 लाख 56 हजार रुपये एडवांस में दे दिए गए थे। इसके एवज में एमबी के मुताबिक उसने मात्र छह लाख 52 हजार रुपये के काम को ही कराया है। जब जांच शुरू हुई थी तो घपले में शामिल लोगों में खलबली मची थी। राजेंद्र पार्क में निर्मित कैफे भी अवैध है। इसके निर्माण के लिए
बोर्ड से कभी प्रस्ताव पारित ही नहीं किया गया। बता दें कि बिना काम कराए ठेकेदार को एक पैसा का भी एडवांस देने का प्रावधान नहीं है।
यहां पर साढ़े 43 लाख का एडवांस दिया जाना भारी वित्तीय अनियमितता को उजागर करता है। गौरतलब हो कि वित्तीय वर्ष 2015-16 में दो करोड़ 27 लाख 567 रुपये में सौंदर्यीकरण करने की सहमति नगर परिषद के पूर्व बोर्ड की सशक्त स्थायी समिति ने की थी। इसी मामले में करोड़ों रुपये की हेराफेरी का आरोप लगाते हुए इनके ऊपर कार्रवाई की गई है। इस मामले में नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी बसंत कुमार ने बताया कि अभी तक हमें कोई अधिकारिक जानकारी नहीं है। जानकारी मिलते ही निर्देशों का पालन किया जाएगा।




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