मांझी(सारण)। कोरोना काल में विद्यालय में नामांकित बच्चों को मध्याह्न भोजन के बदले चावल का वितरण किया जाना है। जबकि चावल के साथ दी जाने वाली खाद्य-सामग्रियों की राशि विभाग द्वारा सीधे अभिभावकों अथवा बच्चों के बैंक के खाते में भेजनी है। विभाग का सख्त निर्देश है कि शत-प्रतिशत छात्र-छात्राओं का डीबीटी कराना है। जिसकी जवाबदेही प्रधानाध्यापकों को दी गई है। उधर विभाग के द्वारा 60-70 प्रतिशत बच्चों के लिए हीं चावल उपलब्ध कराया जा रहा है। ऐसी परिस्थिति में शिक्षकों के सामने विकट समस्या उत्पन्न हो गई है। प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रधान सचिव दिनेश कुमार सिंह एवं मांझी के अंचल सचिव मुरलीधर सिंह ने बताया कि एक तरफ शत-प्रतिशत बच्चों का डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर कराना है। वहीं चावल की मात्रा में विभाग द्वारा कटौती की जा रही है। आखिर किस आधार पर 30 से 40 बच्चों को मिड डे मील के चावल से वंचित किया जाय। ऐसे में शिक्षक उहापोह की स्थिति में हैं। वहीं चावल वितरण में हंगामा की स्थिति बनने की प्रबल संभावना है।