क्या आज भी रावण के पुतला दहन का कोई औचित्य है !

आज विजयदशमी है, कहते हैं आज ही के दिन प्रभु श्री राम ने लंका पति रावण का वध किया थ। हम आज भी हर वर्ष आज के दिन जगह-जगह पर रावण का पुतला दहन करते हैं और अपनी आने वाली पीढ़ी को यह बताते हैं की रावण बुराई का प्रतीक था, जिसका वध प्रभु श्री राम ने किया था।

अब यहां दो यक्ष प्रश्न है की श्री राम कौन थे ?
और रावण कौन था ?
आखिर रावण ने ऐसी कौन सी बुरी काम की थी जिसकी वजह से प्रभु श्री राम को रावण का वध करना पड़ा ?

रावण, भगवान शंकर का वह अन्य भक्त था जो एक बार उन्हें कैलाश सहित लंका ले जाने के लिए कैलाश पर्वत को ही उठा लिया था, भक्ति की ऐसी मिसाल की अपने आराध्य को खुश करने के लिए अपना शीश काट कर अपने आराध्य को समर्पित कर देना, वह भी एक नहीं दस बार। वह त्रिकालदर्शी विद्वान जिसे एक युग आगे और एक युग पीछे तक की सारी कहानी पता थी। मतलब भूत, भविष्य और वर्तमान को जानने और समझने की शक्ति जिसमें थी वह था रावण, इतना बलशाली इतना ताकतवर था रावण की उसने नवग्रह तक को अपना बंदी बना रखा था। संपति इतनी की पूरी की पूरी लंका ही सोने की थी। आप तो बस इतना सोचिए कि महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती का ऐसा आशीर्वाद उस समय तीनों लोकों में किसी के पास था ही नहीं, रावण जैसा शक्तिशाली, रावण जैसा ज्ञानी और रावण जैसा धनवान तीनों लोकों में कोई दूसरा था ही नहीं। अरे उस उयक्ति के बारे में और क्या कहें जिसे मारने के लिए स्वंय नारायण को धरती पर अवतार लेना पड़ा।और राम के बारे में क्या बताएं जो साक्षात नारायण ही थे।

फिर अंतर क्या था दोनों में, दोनों शक्तिशाली थे, दोनों ज्ञानी थे, दोनों आपार वैभव के मालिक थे।अंतर था तो केवल अपने बल, बुद्धि और ऐश्वर्य के उपयोग और दुरुपयोग का।रावण के पास ताकत थी तो वह अपने ताकत का दुरुपयोग करता था, वह ऋषि मुनियों को साधु संतों को मरता पिटता था, उनको पूजा पाठ यज्ञ आदि नहीं करने देता था, मनुष्य तो मनुष्य देवताओं को भी नहीं छोड़ता था यहां तक कि नवग्रह को भी बंदी बना कर अपने सिंहासन के नीचे सीढ़ियों में कैद कर दिया था। यानी ताकतवर था तो पूरी दुनिया में आतंक मचाए हुए था।

धन था तो उसका उपयोग अपने जनता की भलाई के लिए ना करते हुए अपने वैभव को प्रदर्शित करने में खर्च करता है, अरे सोने का लंका वैभव को प्रदर्शित करना ही है न?ज्ञान था तो उसका भरपूर दुरुपयोग करता था। अरे जो व्यक्ति स्वयं त्रिकालदर्शी हो, और यह जानता हो की वह जिस माता सीता का अपहरण कर के ला रहा है वह साक्षात महालक्ष्मी है, और नारायण के साथ है, अगर मैं इन्हें ले गया तो मेरा सर्वनाश निश्चित है, फिर भी हर ले गया तो उस ज्ञानी के ज्ञान को आप क्या कहेंगे??

और प्रभु श्री राम इससे बिल्कुल विपरीत अपने शक्ति का प्रयोग ऋषि मुनियों की रक्षा करने हेतु राक्षसों का संघार करने में करते थे।विवेकवान ऐसा की जानते थे कि रावण महा ज्ञानी है तो जब वह मृत्यु शैय्या पर लेटा था तब लक्ष्मण को उससे ज्ञान लेने हेतु भेजे, यानी ज्ञान किसी से भी ली जा सकती है, चाहे वह दुश्मन ही क्यों ना हो।और वैभव, अरे जिसने चक्रवर्ती सम्राट की गद्दी को ठोकर मार कर संन्यासी की भांति वन जाना चुना हो उससे वैभवशाली भला कौन होगा??

बस यही मात्र अंतर था प्रभु श्री राम और रावण में।।

चलिए अपने अगल बगल झांकते हैं और देखते हैं कि हमारे अगल बगल में, गांव नगर में, जिला, प्रदेश या देश में कितने राम है कितने रावण? राम और रावण होने की पहली शर्त है कि आपको शक्तिशाली, वैभवशाली और ज्ञानी होना पड़ेगा।

खैर आज के समय में तीनों एक व्यक्ति के पास मिलना तो असंभव सा है, मगर आज का शक्तिशाली मतलब पावरफुल व्यक्ति कौन है?ये दो तरह के लोग है पहले वे जिन्हें विधायिका कहते हैं, जिन्हें हम और आप वोट देकर अपना जनप्रतिनिधि चुनते हैं फिर चाहे वह वार्ड पार्षद हो, मुखिया, सरपंच, पैक्स अध्यक्ष, प्रखंड प्रमुख, जिला पार्षद, विधायक, या सांसद, फिर चाहे उसमें से कोई मंत्री बने, मुख्यमंत्री बने या फिर प्रधानमंत्री हमारे आपके वोट से ये ताकतवर बनते हैं।

दूसरे होते है वे जिन्हें कार्यपालिका कहते है, जो विभिन्न परीक्षाओं को पास कर सरकारी कर्मचारी बनते हैं जिसमें चपरासी से लेकर मुख्य सचिव और चौकीदार से लेकर डीजीपी तक आते हैं।

अब आप जरा इन ताकतवर लोगों यानी पावर में रहने वाले पावरफुल लोगों में जिन्हें भी आप जानते पहचानते हो उनको जरा देखिए, उनके आचार, विचार और व्यवहार का मूल्यांकन किजिए और फिर देखिए की इनमें किसका गुण विद्यमान है, श्री राम का या रावण का ? जवाब आपको स्वयं मिल जाएगा।।

जरा सोचिए, थोड़ी सी ताकत, थोड़ा सा पैसा, थोड़ी सी शोहरत, थोड़ी सी पावर मिलने के जब हमारे आपके बीच के लोग सता के नशे में चूड़ होकर हर वो अनैतिक कार्य करने लगते हैं जिससे केवल और केवल उनके, उनके बच्चों और उनके परिवार वालों का भला हो सके, तो फिर रावण तो रावण था।

प्रभु श्री राम के इस पावन भूमि पर आज पग पग पर रावण के अनुयायी भरे पड़े हैं फिर भी हम प्रत्येक वर्ष विजयदशमी को रावण का पुतला जलाते है और अपने बच्चों को गर्व से यह बताते हैं कि बुराई पर अच्छाई की जीत हो विजयदशमी का पर्व है।।क्या आज रावण का पुतला जलाने का कोई औचित्य शेष है?
रावण का पुतला जरूर जलाएं, मगर आग वह लगाए जिसमें श्री राम का गुण हो।। जय श्री राम।।🙏🙏
✍️ विकाश सिंह
(राजनीतिक विश्लेषक)