वायु प्रदुषण, प्रदुषण का सबसे घातक रूप-रूढ़ी 
#क्लाइमेट पार्लियामेंट के चेयरमैन है श्री रुडी
#दैनिक खोज खबर सेंट्रल डेस्क 

नई दिल्ली, 06 दिसम्बर, 2017 
विश्व बैंक के एक अध्ययन के अनुसार वायु प्रदुषण, प्रदुषण का सबसे घातक रूप है। विश्व में समयपूर्व होने वाली मौतों के लिए यह चौथा प्रमुख कारण है। बाहरी और घरेलू वायु प्रदूषण से जनित बीमारियों के कारण अब तक अनुमानित 5.5 मिलियन लोग मौत के शिकार हो चुके है। विश्व औद्योगिकीकरण के साइड इफेक्ट के रूप में संसार इन दिनों कई तरह के प्रदुषणों से प्रभावित है। इनमें वायु प्रदुषण विश्वव्यापी प्रदुषण है। वायु समुची धरती पर एक ही है और कहीं एक क्षेत्र का वायुमंडल प्रभावित होने पर उसका अधिक या कम नुकसान दुर दराज के क्षेत्रों को भी होता है। जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए मंगलवार को दिल्ली में आयोजित सम्मेलन में सारण लोकसभा संसदीय क्षेत्र के सांसद राजीव प्रताप रुडी ने उक्त बातें कही। मालूम हो कि श्री रुडी की अध्यक्षता में दिल्ली में मंगलवार और बुधवार को दो दिवसीय अंतर्राष्टीय क्लाइमेट पार्लियामेंट सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस अवसर पर केन्द्रीय ऊर्जा मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  आरके सिंह, सांसद  राकेश सिंह, सांसद  संजय जायसवाल, मेरीलोर त्रेतांज ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम में बेनिन से सांसद जीन माइकल अबीबोला, ट्यूनीशिया से सांसद लैला आउल्ड, युगांडा से सांसद लॉरेंस सोंगा बियिका व अन्य उपस्थित थे। 

अपने अध्यक्षीय संबोधन में श्री रुडी ने कहा कि विश्व में अक्षय ऊर्जा के एकीकरण व गहन बुनियादी ढांचा में सुधार लाने के लिए, जलवायु संसद का सृजन किया गया। इसके लिए मै ग्रीन ग्रिड एलायंस को बधाई देता हूं। उन्होंने कहा कि भारत ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण विश्व जलवायु परिवर्तन से प्रभावित है। पर भारत इसके प्रभाव से समकालीन और दीर्घकालीन रूप से निपटने के लिए अक्षय उर्जा के क्षेत्र में निरंतर कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारत में अक्षय उर्जा के क्षेत्र में सर्वाधिक उपयोग इन दिनों सौर उर्जा का हो रहा है। यह सबसे सुलभ और सस्ता भी है। कई कंपनियां इस क्षेत्र में माननीय प्रधानमंत्री के अपारंपरिक उर्जा स्रोत के बढ़ावा देने के कारण भारी निवेश कर रही है। देश के कई क्षेत्रों में सौर बिजली संयंत्र भी लगाये जा रहे है और कुछ क्षेत्र में सौर बिजली संयंत्र व्यावसायिक रूप से कार्य भी कर रहे है।
विदित हो कि जलवायु परिवर्तन को रोकने और अक्षय उर्जा को बढ़ावा देने के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जलवायु संसद (क्लाईमेट पार्लियामंेट) का सृजन किया गया था। विश्व के संसदीय समुहों, विद्यायी कार्याें में लगे समुहों को इसके साथ जोड़कर इसका निर्माण किया गया। इस संसद का उदेश्य राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तरों पर सांसदो के साथ पहल कर आवश्यक गति और पैमाने पर वैश्विक नवीकरणीय उर्जा को गति देना और अक्षय उर्जा को बढ़ावा देना है। जलवायु संसद विश्व में राष्ट्रीय संसदीय समूहों, अंतर्राष्ट्रीय मीटिंग्स और इंटरनेट आउटरीच के माध्यम से, दुनिया के बिजली आपूर्ति को नवीकरणीय बनाने के लिए सार्वजनिक और निजी निवेश दोनों के लिए प्रयास कर रही है।