लॉकडाउन में 50 दिनों से मांझी में फंसे बारातियों के घर लौटने की मिली इजाजत, रवाना


छपरा । मांझी मे लॉक डाउन के बीच सरकार द्वारा प्रवासियों को वापस घर लौटने की छूट मिलने के बाद मांझी प्रखंड के इनायतपुर पंचायत के भिखमही टोला में फंसे बाराती 50 दिन के बाद दुल्हन खुशबू के साथ पश्चिम बंगाल के लिए बस से रवाना हो गए। इस दौरान बाराती पक्ष समेत दुल्हन के परिजनों के आंखों से विदाई व घर लौटने की खुशी में आंसू छलक गए। बारातियों ने लंबी अवधि तक स्थानीय लोगों तथा सामाजिक संगठनों का आतिथ्य व सेवा भावना की जमकर सराहना की। बारातियों ने कहा- बिहार के लोगों द्वारा की गई मेहमान नवाजी जीवन में हम कभी नही भूलेंगे। यह बारात भी जीवन भर याद रहेगी। बता दें कि दाउदपुर थाना क्षेत्र के इनायतपुर टोला भिखमही में 22 मार्च को पश्चिम बंगाल से बारात पहुंची थी। इस्लामिक रीति रिवाज से शादी संपन्न हुई। इसी बीच कोरोना वायरस के तेजी से हो रहे फैलाव रोकने के मद्देनजर केंद्र सरकार ने जनता कर्फ्यू के बाद सम्पूर्ण देश में 23 मार्च को ट्रेन बंद करने व 24 मार्च लॉक डाउन की घोषणा कर दी। जिससे बारातियों समेत दूल्हा व दुल्हन भी बुरी तरह फंस गए। बारातियों ने बीच मे कई बार लौट जाने का प्रयास किया मगर विफल रहे। वे पड़ोस के हीं एक विद्यालय में ठहरे थे। इधर घर लौटने की छूट मिलने के बाद दूल्हा व दुल्हन पक्ष ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर घर वापसी की गुहार लगाई। उसके बाद मांझी के विधायक विजय शंकर दुबे, जिप प्रतिनिधि मन्नान खां, पड़ोसी रहमत अली व साबिर अली के अथक प्रयास से जिला प्रशासन  सारण के एडीएम डॉ. गगन द्वारा अनुमति- पत्र प्राप्त होने के बाद  दुल्हन समेत कुल 27 बाराती बस द्वारा प. बंगाल के लिए रवाना हुए। दुल्हन खुशबू के पिता नैमुल्लाह सिद्धिकी ने बड़े  सम्मान के साथ बारातियों को विदा किया। मालूम हो कि लम्बी अवधि तक दूल्हा दुल्हन समेत बारातियों के फंसे होने की  मीडिया व सोशल मीडिया पर जबरदस्त चर्चा हुई थी तथा स्थानीय अलहक फाउंडेशन तथा अनुभव जिंदगी का नामक सोशल मीडिया ग्रुप ने बारातियों को हरसम्भव सहायता उपलब्ध कराई थी।