मांझी के चुनाव में घमासान, कह रहे हैं लेकिन लक्ष्य भेदना नहीं है आसान

मनोज कुमार सिंह/मांझी(सारण)। एनडीए की महिला प्रत्याशी माधवी सिंह का चुनाव चिन्ह तीर अपना लक्ष्य भेदने में सफल होगा या कि हंसिया हथौड़ा का धारदार व धमाकेदार चोट तीर की नोक को निष्तेज कर देगा। मांझी विधान सभा की कुल 36 पंचायतों के मतदाताओं की जुबान पर आजकल यही सवाल तैर रहा है। मांझी के नर पलिया बाजार में कल सम्पन्न बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार तथा कोपा।अनवल। खेल के मैदान में सम्पन्न जेएनयू के पूर्व अध्यक्ष व बहुचर्चित बामपंथी नेता कन्हैया कुमार की सभा की सफलता के बाद मतदाता सीधे दो भागों में विभक्त नजर आने लगे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक पिछले विधान सभा चुनाव की तुलना में इस बार की लड़ाई आमने सामने की होगी।दोनों पक्ष के मतदाता गोलबंद होना शुरू हो चुके हैं। एनडीए के लगभग एक दर्जन टिकटार्थियों के साथ टिकट की प्रतिस्पर्धा में शामिल मांझी विधान सभा की नई नवेली दुल्हन माधवी ने टिकट झटक कर मांझी की राजनीति के पुराने धुरंधर पूर्व मंत्री गौतम सिंह लोजपा नेता केशव सिंह तथा राजद छोड़कर भाजपा में शामिल हेमनारायण सिंह को सकते में डाल दिया। यही नही माधवी के टिकट मिलने के बाद तीनों नेताओं ने चुनाव लड़ने की समर्थकों की मांग ठुकरा दी। बावजूद इसके बसपा समर्थित रालोसपा के प्रत्यासी पूर्व मुखिया ओम प्रकाश कुशवाहा तथा सांसद जनार्दन सिंह सिग्रीवाल के बेहद करीबी युवा नेता राणा प्रताप उर्फ डब्ल्यु सिंह रण क्षेत्र में पूरे दमखम के साथ कूद पड़े हैं। राणा प्रताप पड़ोस के दरौंदा विधान सभा उप चुनाव में जीते भाजपा के बागी ब्यास देव सिंह का हवाला देकर अपने उत्साहित युवा कार्यकर्ताओं को अपनी जीत का घूंट पिला रहे हैं। उनका दावा है कि तीसरी बार में तीतर का शिकार करने में वे अवश्य सफल हो जाएंगे। हालाँकि पिछले दिनों बनवार स्थित शिव वाटिका परिसर में आयोजित एनडीए कार्यकर्ताओं की बैठक में सांसद जनार्दन सिंह सिग्रीवाल ने बड़े ही स्प्ष्ट तौर पर कार्यकर्ताओं का आह्वान किया कि वे माधवी की जीत सुनिश्चित कराने के लिए तन मन धन से जुट जायँ। सांसद के निर्देश के बाद भाजपा के सुस्त पड़े कार्यकर्ता अचानक मुखर हो गए हैं। और डोर टू डोर जनसम्पर्क करने लगे हैं। छपरा विधानसभा के चुनाव से वंचित बजरंग दल के पूर्व प्रदेश संयोजक राहुल मेहता के मांझी चुनाव में सक्रिय हो जाने के बाद माधवी की चुनावी फिजा बदलने लगी हैं।
पूर्व जिप उपाध्यक्ष व वर्तमान जिप सदस्य विजय प्रताप उर्फ चुन्नू सिंह भी निर्दलीय प्रत्यासी के तौर पर चुनाव लड़ रहे हैं और अपनी जीत के दावे कर रहे हैं।उधर राजनीति की नई खिलाड़ी माधवी सिंह का सामना महागठबंधन के प्रत्यासी तथा मांझी की राजनीति के आक्रामक राजनीतिज्ञ डॉ सत्येन्द्र यादव से है। डॉ सत्येन्द्र जमीन से जुड़े माकपा नेता हैं। माकपा की सुगठित कार्यकर्ताओं की टीम के साथ मिलकर आम जनता की समस्याओं के माध्यम से जिला प्रशासन तक अपनी हनक व धमक का अहसास कराने की क्षमता रखने वाले महारथी माने जाने वाले नेता डॉ सत्येन्द्र को राजद व कांग्रेस की बड़ी फौज का समर्थन मिलना भी आसान नही था। महागठबंधन की सहयोगी माकपा मांझी सहित अपनी मनपसंद की चार सीट पाने के लिए अड़ गई और कांग्रेस के सिटिंग विधायक पूर्व मंत्री विजय शंकर दुबे को मांझी छोड़कर महाराज गंज जाना पड़ा। माकपा कार्यकर्ताओं की नजर में यह डॉ सत्येन्द्र की बड़ी जीत मानी जा रही है। हालाँकि डॉ सत्येन्द्र की राजनीति की आक्रामक शैली से ब्यथित मांझी से दो बार विधायक रहे पूर्व विधायक बुद्धन प्रसाद यादव ने अपने भतीजे व पूर्व मुखिया डॉ सत्यनारायण प्रसाद यादव के पुत्र ई सौरभ सन्नी को चुनावी रण में उतार दिया है। श्री यादव का दावा है कि अब भी पिछड़े अति पिछड़े व अल्पसंख्यक मतदाता उन्हें ही अपना नेता मानते हैं। इस लिहाज से उनके भतीजे की जीत सुनिश्चित है। यूं तो मैदान में कुल सोलह प्रत्यासी मैदान में हैं पर लोजपा के शिक्षाविद प्रत्यासी सौरभ पाण्डेय भी चिराग पासवान की नई राजनीतिक छवि व परम्परागत तथा जातिगत समीकरणों के साथ साथ भाजपा के क्षुब्ध मतदाताओं के बलबूते अपनी जीत का भरोसा मतदाताओं को दिला रहे हैं। सपा के नेता व पेंशनर समाज के अध्यक्ष भूतपूर्व सैनिक राम नारायण यादव तथा भाजपा नेता व अभिनेता सुजित पूरी ने भी क्रमशः अपनी अपनी पार्टी से बगावत कर चुनावी रण में विरोध का बिगुल बज दिया है। कुल मिलाकर स्वतंत्रता आंदोलन में अग्रणी भूमिका निभाने वाली पंडित गिरीश तिवारी रामेश्वर दत्त शर्मा राम बहादुर सिंह द्वारा सिंचित संत धरणी नगर।मांझी। राजनीति की एक नई पटकथा का इबारत लिखेगी यह तय है।