तब के और अब के चुनाव प्रचार में देखने को मिल रहा है बड़ा फर्क
मनोज कुमार सिंह/मांझी(सारण)। मांझी विधानसभा चुनाव पिछले चुनावों के बनिस्पत कई मामलों में इस बार भिन्न दिख रहा है। दरवाजे-दरवाजे पैदल अथवा साइकिल से जाकर अपने दल के प्रत्याशी के लिए वोट मांगने की प्रक्रिया अब कहीं नही दिखती। कुछ खास कार्यकर्ता बाइक के सहारे गड़बड़ मतदाताओं को ठीक करने।सेटिंग। करने उनके दरवाजे तक जा रहे हैं। कार्यकर्ता को कौन कहे प्रत्यासी भी सिर्फ गांव की गलियों में पैदल दिखते हैं। बाकी गंवई रास्तों पर भी सिर्फ लक्जरी गाड़ियां दिख रही हैं। चहेते कार्यकर्ताओं के लिए सफारी तथा स्कॉर्पियो तथा बुजुर्ग व थोड़ा कम महत्वपूर्ण नेताओं को बोलेरो की सवारी करनी पड़ रही है। यूं तो इस बार कुल 16 प्रत्यासी चुनावी अखाड़े में हैं। पर अधिकांश कार्यकर्ता अपने प्रत्यासी से नाखुश नजर आ रहे हैं। कारण यह है कि प्रत्यासी घर घर जाकर हाथ जोड़कर वोट मांगने वाले कार्यकर्ताओं की तुलना में अच्छी मोबाईल रखने वालों युवा कार्यकर्ताओं को ज्यादा तरजीह दे रहे हैं। मोबाइल युक्त कार्यकर्ता चंद मिनटों में आकर्षक फोटो बीडीओ सोशल मीडिया पर शेयर कर नेताजी को खुश कर दे रहे हैं। कार्यकर्ताओं के लिए स्वादिष्ट भोजन और जेब में कुछ नकद बमुश्किल ही मिल पा रहा है। यही वजह है कि ज्यादा कार्यकर्ता उसी तरफ दिख रहे हैं जिधर लक्जरी गाड़ियां हैं अच्छे भोजन की ब्यवस्था है और शाम को घर लौटते समय कुछ नकद हासिल हो जा रहा है। कई बार तो नेता कहलाने वाले लोग अपने भाषणों की तारीफ करके प्रत्यासी से मोटी रकम ऐंठने के लिए प्रत्यासी के पीछे भागते नजर आ रहे हैं। कुछ प्रत्यासी सभी दल के कार्यालयों का चक्कर काट रहे हैं शायद कुछ हाथ लग जाय। राज्य में शराब बंदी के कारण कार्यकर्ता बेहद मायूस हैं। लुका छिपा कर नेता शाम को अपना हलक तर कर रहे हैं। हालांकि आज भी वैसे अनेक कार्यकर्ता हैं जो अपने दल अथवा प्रत्यासी की जीत सुनिश्चित करने के लिए खुद अपना खर्च कर जनसम्पर्क कर रहे हैं।




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