दैनिक खोज खबर/बलिया/छपरा।  गत् 21 मार्च, 2025 को समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव, राज्यसभा सांसद, रामजीलाल सुमन ने गृह मन्त्रालय के कामकाज के दौरान सदन में कहा कि “उप-सभापति जी ! हिंदुस्तान का मुस्लमान तो बाबर को अपना आदर्श नहीं मानता है। वो मोहम्मद साहब को अपना आदर्श मानता है। सूफी-संतो की परम्परा को अपना आदर्श मानता है।…..उप-सभापति जी ! मैं जानना चाहूँगा कि बाबर को कौन लाया था। बाबर को इब्राहिम लोदी को हराने के लिए राणा सांगा लाया था। तो मुस्लमान तो बाबर की औलाद हैं। तुम गद्दार राणा सांगा की औलाद हो।” इसपर पीठासीन उपसभापति, हरिवंश नारायण सिंह ने उन्हें डपटकर बैठने को कहा और संसदीय मर्यादा का पालन करने की हिदायत दी। बाद में सदन की गतिविधि से उक्त विवादित बयान को हटा दिया गया। देखते ही देखते इस विवादित बयान पर विवाद खड़ा हो गया। राजनीतिक दलों और गैर राजनैतिक संगठनों के तमाम कार्यकर्ता सड़क पर उतरकर रामजीलाल सुमन की निंदा कर रहे हैं। ऐसे में देशभर के इतिहासकार, लेखक, कवि और समस्त प्रबुद्धजन माननीय सांसद की तुष्टिकरण की सोच पर अफ़सोस जता रहे हैं।
       बहरदोई (हाथरस) निवासी सांसद, रामजीलाल सुमन, एलएलबी पुराने एवम् वरिष्ठ सपाई नेता हैं, लेकिन उनके बयान ने भारतीय इतिहास को कलंकित कर दिया, उनके बयान ने सदन की गरिमा को धूमिल कर दिया, उनके बयान ने भारतवर्ष के मानबिंदु के गौरव को मिट्टी में मिला दिया। उन्हें अपने इस कृत्य के लिए पूरे देश से माफ़ी माँगनी चाहिए और कभी किसी ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में बोलने से पूर्व इतिहास को ध्यान से पढ़ लेना चाहिए। मेवाड़ के अप्रतिम शासक, सिसोदिया राजवंश के महाराणा संग्राम सिंह, यानी राणा सांगा (महाराणा कुम्भा के पौत्र एवं महाराणा रायमल के पुत्र) की बहादुरी के किस्से देशवासी सदियों से सुनते आ रहे हैं। सबने सुना है कि राणा साँगा इतने वीर थे की एक भुजा, एक आँख, एक पैर खोने एवं शरीर पर पड़े अगणित घावों के बावजूद उन्होंने अपना पराक्रम नहीं खोया और ऐसे महान् शासक को माननीय सांसद ने गद्दार कहकर सम्बोधित किया। सांसद द्वारा कही गई बात कि इब्राहिम लोदी को हराने के लिए राणा सांगा ने बाबर को बुलाया था; एक कपोल-कल्पित बात है, क्योंकि राणा सांगा ने 1517 में खतौली (कोटा) के युद्ध में और फिर 1518 में बाड़ी (धौलपुर) के युद्ध में इब्राहिम लोदी को बुरी तरह परास्त किया था। ऐसेमें यह कहना कि स्वयं से दो बार हारे हुए सुल्तान को हराने के लिए राणा साँगा ने बाबर को बुलाया तर्कसंगत बात नहीं लगती है। दूसरी बात यदि राणा सांगा ने बाबर को आमंत्रित किया था, तो फिर दोनों में युद्ध क्योंकर हुआ। सर्वविदित है कि साँगा और बाबर के मध्य पहला युद्ध फरवरी 1527 मे बयाना में हुआ, जिसमें क्षत्रिय सेना ने बाबर की सेना को भगा दिया और फिर 17 मार्च, 1527 को दोनों की सेना खानवा में आमने-सामने हुई। इस युद्ध में राणा साँगा घायल हो गए, अतः उन्हें युद्ध के मैदान से हटाकर बसवा (दौसा) ले जाया गया।
        यदि राणा ने बाबर को बुलाया होता, तो बाबर द्वारा स्वलिखित जीवनी, ‘तुज़्क-ए-बाबरी’ (बाबरनामा) में इसका ज़िक्र होना चाहिए था।लेकिन बाबर ने अपनी जीवनी में सांगा के बारे में कुछ और ही लिखा है। बाबरनामा में राणा सांगा का उल्लेख है कि “बादशाह लिखते हैं कि जब हम काबुल में थे तो राना ने खैर ख़्वाही से एलची भेजकर यह बात ठहराई थी कि जब बादशाह उधर से दिल्ली तक आजावेंगे तो मैं आगरे की तर्फ़ कूच करूँगा मैंने इब्राहीम को ज़ेर करके दिल्ली और आगरा ले लिया वहाँ तक भी इस हिन्दू को तर्फ़ से कुछ हरकत जाहिर न हुई मगर इसने कई मंजिल बढ़कर खंडार का किला जो मुकन के बेटे हुसेन के कब्जे में था घेर लिया……”
        इस प्रकरण से पूरा देश बटुली तरह मर्माहत है, इस पीड़ादायक प्रकरण के संदर्भ में ‘दैनिक खोजख़बर’ के सम्पादक, मनोकामना सिंह का कहना है कि “देशवासियों को अपना इतिहास पढ़ना चाहिए, जिससे उनका आत्मबल बढ़ेगा, उन्होंने राणा सांगा का स्मरण करते हुए श्यामनारायण पाण्डेय की पुस्तक ‘हल्दीघाटी’ की कविता पढ़ी-
           सांगा को अस्सी घाव लगे¸
            मरहमपट्टी थी आँखों पर।
        तो भी उसकी असि बिजली सी
           फिर गई छपाछप लाखों पर॥
अखिल भारतीय क्षत्रिय मंच के आजमगढ़ मण्डल प्रमुख, बृजेश सिंह बघेल ने बताया कि “आजकल एक प्रचलन चल पड़ा है कि सदन में किसी संवेदनशील विषय पर कुछ बोल दो और फिर मीडिया के सामने आकर कहो कि मेरी मंशा वह नहीं थी, जैसा लोगों ने समझा है।”
अखिल भारतीय क्षत्रिय मंच, बलिया के जिला अध्यक्ष, कैप्टन सोहन सिंह ने बताया कि “राणा सांगा जैसे देशरक्षक, जिसने इब्राहिम लोदी और बाबर से कई बार युद्ध किया था, को गद्दार कहनेवाले नेता को माननीय कहलाने का कोई अधिकार नहीं है, उनको सदन से निष्कासित कर देना चाहिए।” पिपराकलां (बलिया) के प्रवीण प्रताप सिंह ने कहा कि “सदन में इस प्रकार की बात करना क्षुद्र मन:स्थिति का परिचायक है, ऐसे सांसदों के विरुद्ध कठोर कदम उठाना चाहिए।”
पता- बलिया, उत्तर प्रदेश।
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