विवेक कुमार की रिपोर्ट:-
चनपटिया: चनपटिया थाने में तैनात चौकीदार शेख नेशार (30 वर्ष) की अचानक खराब तबीयत के चलते मौत हो गई।उनके पैतृक घर कुमारबाग में उन्हें श्रद्धांजलि दी गई।इस मौके पर चनपटिया थानाध्यक्ष मनीष कुमार शर्मा,एएसआई उमाशंकर राम,बंशीधर सिंह,विन्देश्वरी राम भुइँया,जमादार शमीम खां एवं वरुण कुमार के साथ थाना के कई कर्मचारी मौजूद रहे।वहां दो मिनट का मौन रखकर उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना भी की गई।शेख नेशार थाना क्षेत्र के ही कुमारबाग चौक के रहने वाले थाने में चौकीदार के पद पर तैनात थे।जब वह थाने से ड्यूटी कर रात्रि बैंक ड्यूटी कर रहे थें तो उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई,जिससे उसे बेहोशी व उलटी हुई।तबीयत बिगड़ती देख स्थानीय लोगों द्वारा तत्काल परिजनों को सूचना दिया गया।परिजनों द्वारा उन्हें स्थानीय चिकित्सालय लाया गया जहां डॉक्टरों ने उनका उपचार किया।विशेष तबीयत बिगड़ते देख परिजनों द्वारा रात्रि में ही उन्हें गोरखपुर ले जाया जा रहा था तब तक रास्ते मे ही उनकी मौत हो गयी।यह खबर सुनते ही उनकी पत्नी व परिवार के सदस्य में कोहराम मच गया।चौकीदार नेशार अपने तीन भाई व दो बहनों में सबसे बड़े थें।वर्ष 2014 में बड़ी ही धूमधाम से इनकी शादी अफरुजा खातून के साथ हुई।नेशार को एक तीन वर्ष का बेटा है।पत्नी अफरुजा खातून बेतिया के किसी विद्यालय में शिक्षक है।
*चौकीदार पद पर थे तैनात*
इस मामले में थानाध्यक्ष मनीष कुमार शर्मा ने बताया कि शेख नेशार थाने में चौकीदार के पद पर तैनात थे।वह बहुत ही नेक स्वभाव के व्यक्ति थे।ड्यूटी के दौरान उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई,जिससे कि तत्काल उन्हें इलाज के लिए ले जाते समय रास्ते मे ही उनकी मौत हो गयी।
*शव पहुंचते ही मचा कोहराम*
चनपटिया थाने में चौकीदार के पद पर तैनात शेख नेशार का बैंक ड्यूटी के दौरान अचानक तबीयत बिगड़ने से हुई मौत के बाद शव उनके कुमारबाग स्थित घर पर लाने से पूर्व ही मुहल्लेवासी व उनके नजदीकी उनके घर पर जमा थे।सबों की जुबां पर मृतक की यादें थीं।जब शव को गाड़ी से उतारा जा रहा था तब क्रंदन से वातावरण गमगीन हो गया।शव देखते ही चीख-पुकार मच गई। 25 वर्षीय पत्नी अफरुजा खातून को दोनों हाथों से छाती पीटते देखकर सभी की आंखें नम हो गईं।इकलौता तीन वर्ष का बेटा समझ नहीं पा रहा था कि मां को वह कैसे संभाले।हर कोई बस मां-बेटे को ढांढस बंधा रहा था।सैकड़ों लोग शोकाकुल परिवार के साथ खड़े थे।सब समझाते रहे कि नियति के आगे किसी का जोर नहीं।