विवेक कुमार की रिपोर्ट:-

चनपटिया-बेतिया मुख्यमार्ग पर कैथवलिया गैस गोदाम के समीप शाही ट्रेवल्स बस BR 01 PA 4323 के तेज रफ्तार व ओवरटेक के दौरान डिवाइडर से टकराकर बस गड्ढे में पलटने से बाल-बाल बच गयी।बस नरकटियागंज से सवारी लेकर चनपटिया होते हुए बेतिया जा रही थी तभी सुबह करीब 10 बजे के आसपास यह हादसा हुआ।हादसे के बाद बस चालक व कंडक्टर बस छोड़ फरार हो गए।दुर्घटना में एक दर्जन से अधिक सवारियां घायल हो गई।वही दुर्घटना के बाद बस के अंदर सवारियों में चीख-पुकार मच गई।दुर्घटना देख आस-पास के लोग व राहगीर बस में चीख-पुकार कर रही सवारियों को बचाने दौड़ पड़े।थोड़ी ही देर में सुचना मिलने के बाद चनपटिया पुलिस के जवान मौके पर पहुंचे और अन्य लोगों की मदद से घायलों को बस से निकाल स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया,जहाँ उपचार के बाद कुछ सवारियों को छोड़ दिया गया तो वहीं दो सवारी फिरोज राय व इंद्रजीत यादव,पकड़िहार उम्र करीब 40 वर्ष की गम्भीर स्थिति को देखते हुए बेतिया रेफर कर दिया गया।यात्रियों के अनुसार बस की गति तेज और ओवरलोडिंग नहीं होती तो ऐसा हादसा नहीं होता।इस तरह की कोई एक घटना बड़े सबक के लिए काफी होनी चाहिए।लेकिन ऐसा लगता है कि हर कुछ समय के बाद हाइवे के हादसों के बावजूद सरकार या संबंधित विभाग की नींद नहीं खुलती।इस त्रासद घटना ने एक बार फिर यह सोचने को मजबूर कर दिया कि आधुनिक और बेहतरीन सुविधा की सड़कें केवल रफ्तार के लिहाज से जरूरी हैं या फिर उन पर सफर का सुरक्षित होना पहले सुनिश्चित किया जाना चाहिए।हर दुर्घटना को केन्द्र एवं राज्य सरकारें दुर्भाग्यपूर्ण बताती हैं,उस पर दुख व्यक्त करती हैं,मुआवजे का ऐलान भी करती हैं लेकिन एक्सीडेंट रोकने के गंभीर उपाय अब तक क्यों नहीं किए जा सके हैं?जो भी हो,सवाल यह है कि इस तरह की तेज रफ्तार सड़कों पर लोगों की जिंदगी कब तक इतनी सस्ती बनी रहेगी?सच्चाई यह भी है कि जिले में ही नहीं,पूरे बिहार में सड़क परिवहन भारी अराजकता का शिकार है।सबसे भ्रष्ट विभागों में परिवहन विभाग शुमार है।