बेतिया – गौनाहा:– *दिब्यांग का भी होगा अपना घर*

न्यूज इनपुट पश्चिमी चम्पारण गौनाहा से रामायण कुमार की रिपोर्ट :-
*पश्चिमी चम्पारण गौनाहा* सोफा मंदिर पर मुख्यमंत्री को मिली शिकायत को निवारण करते हुऐ डीएम के आदेशानुसार दिव्यांग बारह वर्षीय अर्जुन कुमार को जमीन देने कि प्रक्रिया शुरू कर दी गई है संभवत पच्चीस दिनो में दिब्यांग के पास अपनी जमीन होगी जिसपे प्रधानमंत्री अवास योजना से घर बनेगा । मुख्यमंत्री के द्वारा सारी सुविधायें देने के आश्वासन के बाद अंचल द्वारा दिव्यांग की मां को डोमाठ पंचायत के बलबल में सरकारी जमीन पर घर बनाने के लिए जमीन का चिन्हित किया गया है ।
इस संबंध में अंचलाधिकारी प्रदीप कुमार सिन्हा ने बताया कि दिव्यांग की विधवा मां संतोषी देवी के द्वारा आवेदन मिला हैं जमीनी देने का सारी कागजी प्रक्रिया पूरी कर अनुमंडल में भेज दिया गया हैं । लगभग पच्चीस दिनों के अन्दर सारी प्रक्रिया पूरी कर दिव्यांग की मां को जमीन उपलब्ध करा दिया जायेगा ।
विदित हो कि प्रखण्ड के दोमाठ पंचायत अंतर्गत कैरी गांव निवासी दिब्यांग बारह वर्षीय अर्जुन कुमार ने 23 मई को चम्पारण दौरे पर आये मुख्यमंत्री नितीश कुमार से सोफा मंदिर में दर्शन करने के दौरान दिब्यांग ने दो साल से पेंशन राशि नहीं मिलने की शिकायत किया था । मुख़्यमंत्री ने बच्चे की दास्तान सुनने के बाद डीएम को आदेश दिया कि शीध्र ही जांच पड़ताल कर राशि खाते में भेजा जाए । वही दिव्यांग की विधवा मां ने जमीन नहीं होने की बात मुख्यमंत्री से बताई थी । इन्होने सीएम से शिकायत के दौरान कहा था कि मैं अपने दिव्यांग बच्चे के साथ रेलवे की जमीन में घर बनाकर रह रही हूं । मेरे पास रहने के लिए जमीन नहीं हैं । अगर रेल यातायात शुरु हो जाता है तो हमें वहां से उजड़ना पड़ेगा । इसलिए मुझे रहने के लिए स्थायी जमीन दी जाए। विधवा के बातो ने सीएम के दिल को छुआ था । तत्पश्चात सीएम ने वही से डीएम को आदेश दिया कि दिव्यांग का पेंशन व रहने के लिए जमीन उपलब्ध कराया जाए । इसलिए डीएम के आदेशानुसार सीओ ने दिव्यांग को देने के लिए जमीन को चिन्हित करा फाईल स्वीकृति के लिए अनुमंडल कर्यालय भेज दिया हैं ।
बता दें कि कैरी निवासी स्व. नरेश महतो का बारह वर्षीय नब्बे प्रतिशत दिव्यांग पुत्र अर्जुन कुमार जिसका एक हाथ जन्म से ही नहीं हैं और दूसरा हाथ बारह इंच का हैं । अर्जुन कुमार रा. उ. म. विद्यालय वोटगांव में वर्ग छः का छात्र हैं । वह पैरों से लीख कर पढाई पुरी कर रहा हैं । पैर से चम्मच के सहारे भोजन करता है, पैर से ही चपाकल चलाकर स्नान करता हैं ।
वही उसकी मां संतोषी देवी बताती हैं कि चार साल पहले इस बच्चे के सर से पिता का साया छिन गया कुछ दिन पहले सहारा देने वाला भाई भी साथ छोड दिया । रहने के जमीन नहीं है रेलवे के जमीन में घर बनाकर रहते है और मजदूरी करके अपने बच्चों का पालन पोषण करती है ।




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