“बेगूसराय”– करियर निर्माण में करियर काउंसिलिंग का महत्व

✍ रंजना सिंह (बेगूसराय) की कलम से 👉
एक बेहतरीन करियर हम सभी का सपना होता है,जिसके लिए यह सबसे जरूरी है कि हम हमारी योग्यता व रुचि के हिसाब से सही क्षेत्र का चुनाव करें,किन्तु उचित और पुख्ता जानकारी के अभाव में हम कई बार गलत निर्णय ले लेते हैं।
अक्सर हम देखते हैं 10 वीं के बाद ग्यारहवीं क्लास में विषय चयन को लेकर छात्र/छात्राओं में बहुत उलझने रहती हैं।क्या करना चाहिए?कौन से विषय मे पढ़ाई करें आदि-आदि।परीक्षा में अव्वल नंबर से पास तो हो जाते हैं,परंतु उन्हें आगे क्या चुनना है,इसे लेकर उनमे भ्रम की स्थिति बनी रहती है।उनके इसी भ्रम को दूर करती है काउंसिलिंग।
एक करियर काउंसलर का काम केवल आपका भविष्य संवारना ही नहीं,बल्कि उसके बाद भी पड़ती है।आप यदि किसी समस्या में हैं ,तो उसे समझकर उसका समाधान एक मानसिक सलाहकार का काम है।छात्र चाहे किसी भी
स्ट्रीम अथवा कोर्स के हों,यदि उन्हें सही काउंसिलिंग दी जाए
तो विषयों के चयन ,कॉलेज या विश्वविद्यालय के चयन ,एडमिशन प्रक्रिया ,सिलेबस आदि के बारे में उन्हें पर्याप्त जानकारी हो जाती है।तेजी से सामने आती संभावनाओं के बीच छात्र अपने लिए विकल्प चुनने में स्वयं को असहज महशूस करते हैं,उन्हें यह डर सालता है कि कोर्स या कॉलेज चुनने के लिए उठाया गयाउनका कदम आगे चलकर गलत न साबित हो जाए।
कुछ हद तक उनकी परेशानी जायज भी है,क्योंकि हमारी शिक्षा प्रणाली ही ऐसी है कि 17-18 साल की उम्र तक बच्चे
इतने परिपक्व नही होते की वे यह तय कर सके कि उनके लिए कौन-सा प्लेटफॉर्म उपयुक्त होगा।ग्लैमर से युक्त करियर की ओर आकर्षित होकर ,दोस्तो की देखा-देखी कर अथवा अभिभावक की महत्वाकांक्षाओं की पूर्ति के दबाव में आकर करियर चुनने से उन्हें अपनी क्षमताओं का सही आकलन नहीं हो पाता और वे भँवर जालमें उलझते चले जाते हैं।
एक अच्छा काउंसलर आपको पूर्ण रूप से जानने के लिए
आपसे व्यक्तिगत सवाल भी पूछते हैं,और इस प्रकार आप खुद को भी बेहतर जान पाते हैं।आपके परिवार,स्कूल,कॉलेज,संपर्क,दोस्त,इत्यादि से जुड़ी हर बात
काउंसलर जानना चाहेंगे,ताकि आपकी समस्या की जड़
पता चले।एक काउंसलर न सिर्फ आप मे आत्मविश्वास
जगाता है बल्कि आपकी प्रतिभा पर रौशनी डाल कर
आपको उस ओर प्रोत्साहित भी करता है।वह आपके
चुने गए क्षेत्र की दर्जनों संभावनाओं के बीच मे से आपकी
पसंद की कोई एक स्ट्रीम सामने ला देते हैं,जबकि अंतिम फैसला आपको स्वयं लेना रहता है।कई बार छात्र कोर्स
के नाम और उससे जुड़े अवसरों से तो वाकिफ़ होते हैं,
लेकिन कोर्स का स्ट्रक्चर क्या है,उसके बारे मेंं
उन्हें पता ही नही होता।यह आगे चलकर परेशानी का
सबब बन जााता है।
काउंसलर छात्रों के दिमाग को फिल्टर करते हुए उनके
अंदर चल रहे भटकाव को दूर करने का काम करते हैं,
इससे छात्रों का लक्ष्य स्पष्ट होता है और वे गलत करियर
चुनने से बच जाते हैं।
मानसिक सलाहकार केवल छात्र और उम्मीदवार को
ही नही,उनके परिवार की भी मानसिक रूप से मदद
करते हैं,ताकि वे अपने बच्चों को समझ पाए और
अपने विचार उनपर न थोपें।इस प्रकार पूर्ण रूप से
एक इंसान की सहायता एक करियर काउंसलर करता है,
ताकि सक्षम रूप से ,परिवार की स्वीकृति से वह अपनी
इच्छाओं को पर दे सके।।
रंजना सिंह :– बेगुसराय (लेखिका : साहित्यकार एवं शिक्षिका हैं )




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