बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविन्द होंगे एनडीए के राष्ट्रपति उम्मीदवार
संजय कुमार सुमन संपादक,दैनिक खोज खबर
बीजेपी ने एनडीए की ओर से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार का सोमवार को ऐलान कर दिया। दलित समुदाय से ताल्लुक रखने वाले बिहार के गवर्नर रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति उम्मीदवार बनाया गया है। बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने कोविंद के नाम का ऐलान किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोमवार को बीजेपी के वरिष्ठतम नेताओं से मुलाकात करने के बाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने घोषणा की। पीएम मोदी ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को इसके बारे में जानकारी दे दी है।

दअरसल राष्ट्रपति चुनाव के उम्मीदवार को लेकर सोमवार को भाजपा की सबसे अहम बैठक दिल्ली में हुई। इसमें काफी माथापच्ची के बाद राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के नाम पर मुहर लगी।एनडीए ने बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति पद का अपना उम्मीदवार बनाया है।
रामनाथ कोविंद का चयन
रामनाथ कोविंद स्वयंसेवक हैं। भाजपा के पुराने नेता हैं। संघ और भाजपा में कई प्रमुख पदों पर रहे हैं सांसद रहे हैं। एससीएसटी प्रकोष्ठ के प्रमुख का दायित्व भी निभाया है और संगठन की मुख्यधारा की ज़िम्मेदारियां भी। वो कोरी समाज से आने वाले दलित हैं। यानी उत्तर प्रदेश में दलितों की तीसरी सबसे बड़ी आबादी। पहली जाटव और दूसरी पासी है।
कोविंद पढ़े-लिखे हैं भाषाओं का ज्ञान है। दिल्ली हाईकोर्ट के अधिवक्ता के तौर पर उनका एक अच्छा खासा अनुभव है।सरकारी वकील भी रहे हैं। राष्ट्रपति पद के लिए जिस तरह की मूलभूत आवश्यकताएं समझी जाती हैं, वो उनमें हैं और मृदुभाषी हैं।कम बोलना और शांति के साथ काम करना कोविंद की शैली है।
अगर योगी को छोड़ दें तो मोदी ऐसे लोगों को ज़्यादा पसंद करते आए हैं जो बोलें कम और सुनें ज़्यादा।शांत लोग मोदी को पसंद आते हैं क्योंकि वो समानांतर स्वरों को तरजीह देने में यकीन नहीं रखते। संघ भी इस नाम से खुश है क्योंकि कोविंद की जड़ें संघ में निहित हैं।

लेकिन सबसे बड़ी बात यह है कि कोविंद उत्तर प्रदेश से आते हैं और मोदी के लिए राजनीतिक रूप से मध्य प्रदेश के दलित की जगह उत्तर प्रदेश के दलित को चुनना हर लिहाज से फायदेमंद है।
कोविंद के साथ नीतीश का तालमेल भी अच्छा है। उत्तर प्रदेश से होना और बिहार का राज्यपाल होना दोनों राज्यों में सीधे एक संदेश भेजता है। यह संदेश मध्यप्रदेश से जाता तो शायद इतना प्रभावी न होता। मोदी राजनीति में जिन जगहों पर अपने लिए अधिक संभावना देख रहे हैं उनमें मध्यप्रदेश से कहीं आगे उत्तर प्रदेश का नाम है।बिहार मोदी के लिए एक अभेद्य दुर्ग है और वहां भी एक मज़बूत संदेश भेजने में मोदी सफल रहे।

थावरचंद गहलोत की जगह लेंगे कोविंद
पिछले एक साल से भी ज़्यादा समय से जब-जब भारतीय जनता पार्टी या संघ के भीतरखाने राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार के नामों पर विचार होता था तो एक नाम थावरचंद गहलोत का भी लिया जाता था। माना जाता रहा कि मोदी अगर किसी दलित चेहरे को राष्ट्रपति भवन में भेजने का मन बनाते हैं तो थावरचंद गहलोत उनकी पसंद हो सकते हैं।

थावरचंद गहलोत दलित हैं। मध्य प्रदेश से भाजपा के सांसद हैं।राज्यसभा के लिए चुने गए हैं और फिलहाल केंद्र सरकार में सामाजिक न्याय एवं सहकारिता मंत्री हैं।भाजपा की राजनीति का अपना चरित्र है। यहां दलित चेहरे होते हैं पर उतने चर्चित नहीं जितने अगड़े।यह भाजपा के विचार का जातीय विधान जैसा है। लेकिन फिर भी जो चेहरे हैं, उनमें थावर चंद एक प्रभावी नाम हैं।
तो फिर ऐसा क्या हुआ कि मध्य प्रदेश के इस दलित की जगह मोदी ने कानपुर के एक अन्य दलित चेहरे को अपनी पसंद बना लिया।दरअसल, मोदी राजनीति में अपनी सूची वहां से शुरू करते हैं जहां से लोगों के कयासों की सूची खत्म होती है। जिन नामों पर लोग विचार करते हैं, ऐसा लगता है कि मोदी उन नामों को अपनी सूची से बाहर करते चले जाते हैं। मोदी को शायद इस खेल में मज़ा भी आता है और इस तरह वो अपने चयन को सबसे अलग, सबसे हटकर साबित भी करते रहते हैं। बताया जाता है कि थावरचंद की जगह कोविंद का चयन मोदी के हक में ज्यादा बेहतर और उचित फैसला साबित होगा।

कौन है रामनाथ कोविन्द
रामनाथ कोविंद 16 अगस्त 2015 को बिहार के गवर्नर के पद पर नियुक्त किये गए थे।इससे पहले 1994-2006 तक वो सांसद रहे हैं। राम नाथ कोविन्द का जन्म उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले की (वर्तमान में कानपुर देहात जिला ) , तहसील डेरापुर के एक छोटे से गांव परौंख में हुआ था। कोविन्द का सम्बन्ध कोरी या कोली जाति से है जो उत्तर प्रदेश में अनुसूचित जाति के अंतर्गत आती है।वकालत की उपाधि लेने के पश्चात दिल्ली उच्च न्यायालय में वकालत प्रारम्भ की।वह 1977 से 1989 तक दिल्ली हाई कोर्ट में केंद्र सरकार के वकील रहे। वे भाजपा के दलित प्रकोष्ठ के अध्यक्ष के साथ-साथ बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और अखिल भारतीय कोली समाज अध्यक्ष भी रहे। वर्ष 1986 में दलित वर्ग के कानूनी सहायता ब्युरो के महामंत्री भी रहे। वे 1977 में पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई के विशेष कार्यकारी अधिकारी रहे चुके हैं। कोविंद दो बार राज्यसभा सदस्य रह चुके हैं। हरिद्वार में गंगा के तट पर स्थित कुष्ठ रोगियों की सेवा के लिए समर्पित संस्था दिव्य प्रेम सेवा मिशन के आजीवन संरक्षक हैं। परिवार में पत्नी, एक पुत्र और एक पुत्री है।

आईएएस परीक्षा में तीसरे प्रयास में मिली थी सफलता
परौख गांव में 1945 में जन्मे रामनाथ कोविद की प्रारंभिक शिक्षा संदलपुर ब्लाक के ग्राम खानपुर परिषदीय प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक विद्यालय हुई। कानपुर नगर के बीएनएसडी इंटरमीडिएट परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद डीएवी कॉलेज से बी कॉम व डीएवी लॉ कालेज से विधि स्नातक की पढ़ाई पूरी की।
इसके बाद दिल्ली में रहकर आईएएस की परीक्षा तीसरे प्रयास में पास की। लेकिन मुख्य सेवा के बजाय एलायड सेवा में चयन होने पर नौकरी ठुकरा दी। जून 1975 में आपातकाल के बाद जनता पार्टी की सरकार बनने पर वे वित्त मंत्री मोरारजी देसाई के निजी सचिव रहे थे। जनता पार्टी की सरकार में सुप्रीम कोर्ट के जूनियर काउंसलर के पद पर कार्य किया।
मकान को बना दिया बारातशाला
बिहार के राज्यपाल बनाए गए रामनाथ कोविद तीन भाइयों में सबसे छोटे हैं। परौख गांव में कोविद अपना पैतृक मकान बारातशाला के रूप में दान कर चुके हैं। बड़े भाई प्यारेलाल व स्वर्गीय शिवबालक राम हैं।
टीआरएस का समर्थन का ऐलान
अमित शाह ने कहा कि दलित और पिछड़े वर्गों के लिए कोविंद हमेशा संघर्ष करते रहे हैं। शाह ने कहा, ‘पीएम ने खुद सोनिया गांधी से बात की है। मनमोहन जी से बात की है, सभी को फैसले के बारे में बताया गया है।’ शाह ने साफ किया कि उप-राष्ट्रपति कैंडिडेट को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई है। अमित शाह ने कहा, ‘सोनिया गांधी जी ने बताया है कि हम बातचीत करके आगे के फैसले के बारे में बताएंगे।’ उधर, तेलंगाना के सीएम और टीआरएस चीफ केसी राव ने कोविंद का समर्थन करने का ऐलान कर दिया है।

वहीं, मोदी ने बिहार के सीएम नीतीश कुमार, आंध्र प्रदेश के सीएम चंद्रबाबू नायडू और तमिलनाडु के सीएम पलनिसामी से बातचीत करके कोविंद का नाम फाइनल करने की जानकारी दी। वहीं, वेंकैया नायडू ने बीजेपी के सीनियर नेताओं आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी को कोविंद का नाम ऐलान होने से पहले फैसले के बारे में बताया।





Recent Comments