बगहा प,च,

प्रथम स्वतंत्रता की लडाई के अग्रदूत,18वीं सदी के महानायक ,क्रांतिकारी श्री मंगल पांडे के जयन्ती समारोह के आयोजक किया गया ।

विजय कुमार शर्मा बगहा प,च,बिहार

19जुलाई 1827 को भारत माता की कोख से ऐसे वीर बांकुर का जन्म हुआ।जिसने मात्र केवल 30 वर्षों में वह कर दिखाया जिसे कर सकना एक गरीब के लिए आज भी असंभव है । लेकिन आजादी के उस दीवाने क्रांतिकारी वीर सपूत श्री मंगल पांडे ने 1857 में वह कर दिखाया जिसके लिए पूरा भारत वर्ष ही नहीं बल्कि आजादी की लड़ाई लड़ रहे विश्व के सभी देश भी सदैव ऋणी रहेंगे। क्योंकि अपने परिवार की जीवन -यापन करने के लिए अंग्रेजी सेना में सैनिक के रूप में नौकरी करने वाले, श्री मंगल पांडे ने न केवल अन्याय के विरुद्ध हथियार उठाए। बल्कि अंग्रेज अधिकारी को गोली मारकर उसके नापाक इरादे को नेस्तनाबूद किया ।यह उसकी महान देश भक्ति नहीं तो और क्या है ?सच तो यह है कि जो देश भक्त होते हैं उनकी कोई जाति नहीं होती ।वे केवल राष्ट्रवादी होते हैं और उनकी एक जाति होती है वे भारतीय होते हैं। इसलिए शहीद श्री मंगल पांडे को प्रथम भारतीय स्वतंत्रता की लड़ाई का अग्रदूत कहा जाता है।
शहीद श्री मंगल पांडे का जयंती समारोह का आयोजन करने वाले किसी महान विभूति से कम नहीं है। क्योंकि वे रात-दिन एक करके उस महान विभूति के बलिदान को आज सचमुच श्रद्धांजली अर्पित किए। किसी विभूति का जयंती समारोह मनाना या उसके बारे में चिंतन करना उसके गुणों को आत्मसात करने जैसा होता है। अतः आयोजक मंडल और उसमें सहयोग करने वाले प्रत्येक सदस्यों शहीद श्री मंगल पांडे की भांति ही देश प्रेमी और राष्ट्रवादी हैं,आदरणीय व वंदनीय हैं। मैं आयोजक मंडल के सदस्य श्री प्रिंस कुमार पाठक जी,श्री चंदन कुमार मिश्रा जी, श्री मिथिलेश कुमार उपाध्याय जी, प्रोफेसर श्रीअरविंद नाथ तिवारी जी, श्री सुशील कुमार सोनी ,श्री विकाश कुमार पांडेय ,श्री चंदन कुमार गुप्ता और उन्हीं के जैसे उन सभी सम्मानित और उपस्थित गणमान्य व्यक्तित्वों के साथ साथ बिहार सरकार के पूर्व मंत्री श्री राजेश कुमार सिंह जी,श्री राजेंद्र तिवारी जी ,अध्यक्ष श्री विजय पांडे जी और ओम निधि वत्स जी का भी आभारी हूं ।जिन्होंने मुझे भी इस महान विभूति की जयंती समारोह में आमंत्रित कर ,कुछ कहने का अवसर प्रदान किया तथा मुझे सम्मानित किया।
आजादी के दीवाने ने बैरकपुर छावनी से आजादी का वह बिगुल फूंका जिसने पूरे भारत में अंग्रेजी शासन के खिलाफ आजादी की वह संग्राम छेड़ दिया ।जिसने पूरे भारत में अंग्रेजों के सत्ता के खिलाफ एक बगावत शुरू कर दिया ।क्रांतिकारी वीर सिपाही मंगल पांडे ने कारतूस वाली घटना को लेकर अंग्रेज अधिकारियों के आदेश को नकारते हुए ,यह सिद्ध किया कि भारतीय वीर कभी भी किसी की गलत और अनाधिकार प्रयास को स्वीकार नहीं करते ।वह सोए हुए शेर की तरह होते हैं ।जो उनके मातृभूमि के आंचल को बदनाम या दागदार करना चाहताहैं। उसे अपनी जान देकर भी मार गिराते हैं तथा भारत माता की रक्षा करते हैं। ऐसे महान विभूति की कीर्ति कभी धूमिल नहीं हो सकती। क्योंकि कहा गया है कृर्ति यस्य सः जीवति।
अन्त मे ,अपने देश को आजाद कराने के लिए ,अपने सिपाही साथियों को अंग्रेजी शासन के खिलाफ बगावत के लिए तैयार करने वाले ,अंग्रेज अधिकारियों को अपने अपने अचूक निशाने से मौत के घाट उतारने वाले वीर शहीद ,आजादी के दीवाने ,श्री मंगल पांडे के लिए यह ही कहा जा सकता है कि “आओ झुक कर सलाम करें उन्हें जिनके हिस्से में ये मुकाम आता है ।बड़े खुशनसीब होते हैं वे जिनका खून वतन के काम आता है”।
जय हिंद, जय भारत जय । मंगल पांडे अमर रहे।