प्रेस से मिलिए कार्यक्रम में कुलपति

प्रेस से मिलिए कार्यक्रम में कुलपति ने अपने ही पदाधिकारियों के कार्यशैली की एक-एक कर बखिया उधेड़ी

✍️संजय पांडेय/छपरा : पदस्थापना काल से आज तक अपने अजीबोगरीब व बेबाकी के लिए मशहूर जयप्रकाश विश्वविद्यालय के वर्तमान कुलपति डॉ हरिकेश सिंह सोमवार के दिन प्रेस से मिलिए कार्यक्रम रखे थे ।इस कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के पदाधिकारियों को रहने के लिए निर्देश जारी किए गए थे। जिसके आलोक में विश्वविद्यालय के सभी पदाधिकारी उपस्थित थे। मीडिया कर्मियों के सामने ही अपने विभाग के अधिकारियों की बखिया उधेड़ दी कुलपति ने। उन्होंने स्पष्ट रूप से अपने पदाधिकारियों की शिकायत मीडिया कर्मियों के सामने करते हुए यह बात कही कि पदाधिकारी काम करते नहीं चाहते। कुलपति ने यहां तक कह डाला कि इन लोगों की फाइलें सुरक्षित नहीं रहती ।छात्रों की डिग्रियां सुरक्षित नहीं रहती। मीडियाकर्मियों के साथ घूम घूम कर परीक्षा विभाग के अव्यवस्थित रखे हुए कागजातों को कुलपति ने दिखाया ।उन्होंने कहा जयप्रकाश विश्वविद्यालय में जयप्रकाश जी के नाम पर एक पुस्तक उपलब्ध नहीं है। सबसे ज्यादा दुखरा उन्होंने परीक्षा एवं परीक्षा विभाग के कर्मचारियों के लिए ले करके रोया कुलपति ने बताया की छात्र और कर्मचारी दोनों उदासीन है। डिग्री लेने के मामले में। 4675 डिग्रियां पीएचडी एवं स्नातकोत्तर स्तर की तैयार हैं। 150 को छोड़कर सब पर मेरा सिग्नेचर हो गया है लेकिन कोई इसको ले जाने वाला नहीं है। उन्होंने बताया कि स्नातक एवं स्नातकोत्तर स्तर की परीक्षाएं विलंब से चल रही हैं कुलपति ने बताया कि स्नातक के लिए सत्र 15 -18 एवं 16 -19 का सत्र विलंब से चल रहा है,जबकि 17 –20 से सही हो जाएंगे। कुलपति ने बताया कि स्नातकोत्तर का सत्र तीन वर्ष विलम्ब है।

कार्यालय काउंटर पर भीड़

कुलपति ने कहा कि – हमारे पास कर्मचारियों की भी कमी है इसके बावजूद 24 जनवरी से पहले मेरा प्रयास है कि मैं सारी परीक्षाएं खत्म करा कर परीक्षा फल भी दे दूं । विलंब की मजबूरियों को बताते हुए उन्होंने कहा कि 3 महीना चुनाव कार्य के चलते एवं तीन महीना कॉपी की अनुपलब्धता के चलते परीक्षाएं विलंब हो गई । छात्रों के प्रमाण पत्र समय से नहीं मिलने का जब मुद्दा उठाया गया तो उन्होंने यह आरोप परीक्षा विभाग के पदाधिकारियों एवं कर्मचारियों पर थोपते हुए उनकी शिथिलता को उजागर किया तथा उन्होंने कुछ नौकरी प्राप्त व्यक्तियों का सर्टिफिकेट वेरीफिकेशन का मामला दिखाते हुए बताया कि सैकड़ों ऐसे मामले लंबित है। जिसमें छात्र हजार हजार रु0 का ड्राफ्ट लगाए हुए हैं और ड्राफ्ट भी लैप्स कर गया है। उनका सर्टिफिकेट वेरीफिकेशन नहीं होने के चलते उनको नौकरी में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है । यह पूछने पर कि आखिर छात्रों को इतनी परेशानियां क्यों हो रही है उन्होंने कहा कि परीक्षा विभाग कार्य करना ही नहीं चाहता है। जब हम उन लोगों को लिख कर देते हैं छात्रों के पर्ची पर तब छात्रों का ये लोग कार्य करते हैं । छात्रों को जल्दी वे लोग मुझसे मिलने नहीं देते हैं इसके बावजूद भी यदि मैं निकलता हूं और जो छात्र विश्वविद्यालय में घूमते नजर आता है तो उसके कार्य को पूछ कर उसके काम को कराने का आदेश निर्गत करता हूं। परीक्षा विभाग की स्थिति यह है कि फाइल जमीन पर फेंकी पड़ी है। कुलपति ने मीडिया कर्मियों को घुमा घुमा कर दिखाया और बताया कि यहां कार्य करने वाले कर्मचारी स्नातक उत्तीर्ण है क्या ऐसे ही किसी कागजात को रखा जाता है । कार्यालय में डिग्रियों और छात्रों के चालान जमीन पर ऐसे पड़े थे कि कूड़ेदान के तरीके से दिखाई दे रहा था। वास्तव में कोई रखने की व्यवस्था नहीं थी चालान और डिग्रियां जमीन पर इधर-उधर बिखरे पड़े हुए थे। इस बाबत परीक्षा नियंत्रक डॉक्टर अनिल कुमार से बात करने पर उन्होंने कहा की सभी अलमीरा भरे पड़े हैं ।मांग करने पर भी अलमीरा उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं तो आखिर इन कागजातों को कैसे सुरक्षित रखा जाए।

बिखरे कागजात

नए महाविद्यालयों की संबद्धता पर बात की गई तो- आई ओ सी ने बताया कि अभी तक मेरे पास 51 कॉलेजों का कागजात अंतिम तारीख 15 सितंबर तक प्राप्त हुआ है । कमेटी का गठन किया जा रहा है । 25 सितम्बर तक जांच कमेटी गठित हो जाएगी उसके बाद जो भी कॉलेज माननीय उच्च न्यायालय के निर्देश के मानक को पूरा करेंगे उनको राज्य सरकार के पास भेज दिया जाएगा । इस बाबत पूछे जाने पर कि क्या लीज के जमीन वाले महाविद्यालयों को संबद्धता दी जाएगी तो कुलपति ने कहा कि नहीं जिस भी महाविद्यालय के पास लीज पर जमीन है उनके संबद्धता का प्रावधान नहीं हैनामंकन पर बिलम्ब का कारण पूछने पर- पदाधिकारियों ने बताया कि पहली बार नई प्रणाली से नामांकन लिया जा रहा है ।इसलिए थोड़ी तकनीकी समस्या हो गई थी अब समस्या सुलझ गया है।