
परिवार नियोजन साधानों के इस्तेमाल में जिले में तेजी से आया उछाल
- सबसे अधिक मॉर्डन तरीकों को जिलेवासियों ने अपनाया।
- किसी भी तरह के परिवार नियोजन साधनों में आयी 56.9 प्रतिशत की बढ़त
मुजफ्फरपुर। 8 दिसंबर
परिवार नियोजन के साधनों के इस्तेमाल में जिलेवासियों ने काफी दिलचस्पी दिखायी है। यह बात नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वेक्षण 5 के आंकड़े बता रही है। पिछले पांच सालों में जिले ने परिवार नियोजन के मॉर्डन तथा किसी भी तरह के साधनों के इस्तेमाल में काफी तेजी लायी है, कारण है कि इस मामले में मुजफ्फरपुर पूरे बिहार में आगे तो है ही राज्य के मार्डन तरीकों के 23.3 प्रतिशत और किसी भी साधनों के इस्तेमाल में 24.1 के आंकड़ों के साथ देश के आंकड़ों को भी पार कर लिया है। जिले में परिवार नियोजन के मार्डन तरीको का इस्तेमाल एनएफएचएस 5 के अनुसार 55.7 प्रतिशत पहुंच गया है जो एनएफएचएस 4 के अनुसार मात्र 9.2 प्रतिशत था। वहीं परिवार नियोजन के किसी भी साधन के इस्तेमाल में भी जिले ने बढ़ोतरी करते हुए पिछले पांच वर्षों में 56.9 प्रतिशत कर लिया है। जो राज्य और देश के आंकड़ों से कही आगे हैं।
जमीनी परिवर्तन का दिखा असर:
डीसीएम राजकिरण ने बताया कि एनएफएचएस 5 के आंकड़ों में जो बढ़ोतरी है वह विभाग के जमीनी स्तर पर काम करने का ही नतीजा है। इसके लिए आशा इस पूरे कार्यक्रम की महत्वपूर्ण कड़ी थी। आशा द्वारा हमेशा अपने पास मार्डन तरीकों के साधनों को अपने पास रखती थी। साथ ही वह अपने प्रत्येक गृह भ्रमण पर लोगों को इसके बारे में बताती थी। वहीं उनके द्वारा निकाली गयी रैली, ऑडियो द्वारा प्रचार प्रसार के द्वारा लोगों को परिवार नियोजन के बारे में जागरूक किया गया। स्वास्थ्य केंद्रों पर परिवार नियोजन मेला का आयोजन किया गया। मड़वन की आशा फैसिलेटर रागिनी कहती हैं कि मेरे क्षेत्र में आशा हमेशा अपने झोले में परिवार नियोजन के साधन लेकर चलती हैं। लोगों के बीच दो बच्चों के बीच गैप का महत्व समझ में आने लगा है। लोग अब बिना हिचक के अस्थायी साधनों के बारें में आशा से बात करते हैं और कंडोम, अंतरा की सूई, छाया की मांग करते हैं। वहीं मोतीपुर के लाभार्थी अभिषेक कहते हैं कि मैंने दो बच्चों के बीच अंतर रखने के लिए मॉडर्न तरीकों का इस्तेमाल करता हूं। यह आसानी से मुझे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से मिल जाती है।
हर पीएचसी पर बास्केट ऑफ च्वाइस:
डीसीएम राजकिरण कहते हैं कि हर पीएचसी, सीएचसी तथा अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्र पर कंडोम के बॉक्स रखे गए हैं। खत्म होने पर इसे भरने में भी विभाग काफी तत्पर रहता है। वहीं प्रत्येक पीएचसी तथा सीएचसी पर बॉस्केट ऑफ च्वाइस मौजूद है। यह एक ऐसा कार्नर है जहां कोई भी व्यक्ति जाकर परिवार नियोजन की जानकारी और लााभ दोनों ही ले सकता है। इसके अलावा प्रत्येक आरोग्य दिवस सत्रों पर आशा और एएनएम के द्वारा परिवार नियोजन के लाभार्थी समूह को चिन्हित कर उन्हें मोबलाइज भी करती है।




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