
पत्रकार विमल कुमार यादव हत्याकांड के खिलाफ़ पत्रकारों ने छपरा में निकाला मौन जुलूस

सारण डीएम को मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन
छपरा। अररिया के पत्रकार विमल कुमार यादव की हत्या के विरोध में सारण जिले के पत्रकारों ने नेशनल यूनियन आफ जर्नलिस्ट्स इंडिया सारण इकाई के बैनर तले मौन जुलूस निकाला। शनिवार को नगरपालिका चौक से थाना चौक तक मौन जुलूस निकालकर इस घटना के प्रति अपना विरोध जताया। वही बिहार के मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन जिलाधिकारी अमन समीर को सौंपा। जिसमें राज्य में पत्रकार सुरक्षा कानून को लागू करने, हत्यारों को स्पीडी ट्रायल करके परिजनों को न्याय दिलाने, दिवंगत पत्रकार विमल कुमार यादव के परिजनों को 25 लाख की मुआवजा राशी और आश्रित को सरकारी नौकरी देने की मांग की। साथ ही पत्रकारों को आत्मरक्षा आग्नेयास्त्र के लाइसेंस दिए जाने की मांग भी संबंधित ज्ञापन में सौंपा गया। मौन जूलूस में जिले के प्रबुद्ध पत्रकारों ने हिस्सा लिया। जिसमें दैनिक जागरण के ब्यूरो प्रमुख सह एन यू जे आई के जिला अनुशासन समिति के अध्यक्ष राजीव रंजन , एन यू जे आई के महासचिव राकेश कुमार सिंह, दैनिक भास्कर डिजिटल के जिला प्रमुख डी एस तोमर, जनादेश एक्सप्रेस समाचार पत्र के ब्यूरो प्रभारी मनोकामना सिंह, दैनिक भास्कर के संजय सिंह, हिंदुस्तान समाचार पत्र के शशि भूषण पांडे, बसंत कुमार सिंह, प्रभात खबर के संजय कुमार भारद्वाज, विकास कुमार, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े पत्रकार आलोक कुमार, पंकज कुमार, धनजय कुमार गोलू, मनोरंजन पाठक, विपिन मिश्रा, सुरभित दत्त, रंजीत तिवारी, विशाल राजपूत विपिन कुमार मिश्रा मनोरंजन पाठक, विपुल कुमार, रंजनी शांडिल्य प्रमुख रूप से शामिल रहे। मालूम हो कि पिछले दिन अररिया जिले के रानीगंज में दैनिक जागरण समाचार पत्र से जुड़े पत्रकार को अपराधियों ने गोली मारकर निर्मम तरीके से हत्या कर दी। बताया जाता है कि दिवंगत पत्रकार एक हत्याकांड के प्रमुख गवाह थे, जिसको लेकर अपराधाकर्मियों ने पहले गवाही नहीं देने का दबाव बनाया, लेकिन विमल कुमार यादव ने अपराधियों के दबाव में नहीं आकर गवाही देने पर अडिग रहे। तो अपराधियों ने उन्हें रास्ते से हटाने के लिए गोली मारकर हत्या कर दी। इसको लेकर पूरे प्रदेश के पत्रकारो में उबाल और अपनी सुरक्षा को लेकर चिंताएं भी हैं। जबकि पत्रकर सुरक्षा कानून लागू करने की मांग वर्षो से आ रही हैं, लेकिन इसको लेकर सरकार गंभीर नहीं है। जिसका गंभीर परिणाम बिहार समेत देश के पत्रकार भुगत रहे हैं। देश के अलग अलग हिस्सों से आए दिन पत्रकारों पर हमला एवं उनकी हत्या की वरदाते होते रहती हैं।





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