नसबंदी पखवाड़ा में पुरुषों ने निभाई जिम्मेदारी, 10 पुरुषों ने कराया नसबंदी
•परिवार नियोजन साधनों पर फैलाई जा रही जागरूकता
•नसबंदी कराने वाले पुरूषों को मिलती है प्रोत्साहन राशि
• जिले में 612 महिलाओं का हुआ बंध्याकरण

छपरा/11 दिसंबर: पुरुष नसबंदी को लेकर सरकार द्वारा निरंतर प्रयास किये जा रहे हैं। इस कड़ी में 21 नवंबर से 4 दिसम्बर तक पुरुष नसबंदी पखवाड़ा मनाया गया। इस दौरान जिले के पुरुषों में नसबंदी को लेकर दिलचस्पी देखने को मिली है। पखवाड़ा के दौरान 10 पुरूषों ने नसबंदी कराया है। पुरुषों ने नसबंदी करा कर परिवार नियोजन में अपनी भागीदारी का बेहतरीन संदेश दिया है। यह परिवार नियोजन के लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है। जिले के तरैया में में चार पुरुष, सोनपुर में एक, सदर प्रखंड में दो, मकेर में एक, लहलादपुर में दो पुरुष ने नसबंदी कराया है।
612 महिलाओं का हुआ बंध्याकरण:
जिला स्वास्थ्य समिति के डीसीएम बिजेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि पुरूष नसबंदी पखवाड़ा के दौरान जिले में 612 महिलाओं ने बंध्याकरण करायी है। पहले की तुलना में अब परिवार नियोजन के साधनों के प्रति रूचि बढ़ रही है। जिम्मेदारी के साथ वे परिवार नियोजन के साधनों को अपना रही हैं।

राष्ट्रीय परिवर स्वास्थ्य सर्वे-4 के आँकड़ों के अनुसार सारण में 5.0 प्रतिशत महिला नसबंदी के सापेक्ष पुरुष नसबंदी 0.0 प्रतिशत है. पुरूष नसबंदी में पुरुषों की समान सहभागिता की कमी सामुदायिक स्तर पर सटीक जानकारी के आभाव को दिखाता है.
पुरूषों में बढ़ रही है जागरूकता : सिविल सर्जन डॉ. माधवेश्वर झा ने बताया कि पखवाड़े के दौरान परिवार नियोजन में पुरुषों की भूमिका को लेकर व्यापक चर्चा की गयी। इस पखवाड़ा के पहले चरण में घर- घर जाकर दंपत्तियों से मुलाकात की गयी और उनके परिवार में बच्चों की संख्या व आर्थिक- सामाजिक स्थिति की जानकारी लेते हुए उन्हें परिवार नियोजन की सलाह दी गयी और उन्हें जागरूक किया गया। जिससे पुरूषों में जागरूकता आयी और वे अपनी भागीदारी निभाने के लिए आगे आये। उन्होंने बताया आशाओं व एएनएम के माध्यम से उन्हें यह भी जानकारी दी गयी कि पुरुष नसबंदी महिला नसबंदी की तुलना में अधिक आसान एवं सुरक्षित भी माना जाता है तथा पुरुष नसबंदी से उनको किसी प्रकार का शारीरिक नुकसान नहीं होगा और न ही उनके शारीरिक क्षमता में कमी आयेगी। इन संदेशों के माध्यम से पुरुषों में नसबंदी को लेकर सामाजिक भ्रांतियाँ तोड़ने में सहूलियत मिली है।
सही एवं सटीक जानकारी है जरुरी: पुरुष नसबंदी के विषय में समाज में प्रचारित भ्रांतियों ही पुरुष नसबंदी के प्रति पुरुषों की उदासीनता की वजह है। पुरुष नसबंदी में वांक्षित बढ़ोतरी इसके विषय में सम्पूर्ण जानकारी के साथ जन-जागरुकता पर भी निर्भर करती है।
इन बातों का रखे ध्यान:
• पुरुष नसबंदी से ना ही शारीरिक कमज़ोरी आती है और ना ही पुरुषत्व का क्षय होत है
• दम्पति जब भी चाहे इसे अपना सकते हैं( यदि पुरुष के जननांग में कोई संक्रमण ना हो)
• पुरुष ऑपरेशन के आधे घंटे के बाद घऱ जा सकते हैं
• रोज के काम काज पर कोई भी प्रभाव नहीं पड़ता है
• पुरुष नसबंदी के बाद शरीर में कोई भी बदलाव नहीं होता है

दी जाती है प्रोत्साहन राशि:
पुरुष नसबंदी के लिए यदि इच्छुक लाभार्थी नसबंदी के लिए राजी हो जाता है तो नसबंदी के बाद 3000 रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाती है। इसके अलावा महिला नसबंदी के लिए लाभार्थी को 2000 रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाती है। साथ हीं उत्प्रेरक को भी प्रोत्साहन राशि दी जाती है।