मढ़ौरा
प्रखंड के हसनपुरा पंचायत में मुख्यमंत्री सात निश्चय योजना गली-गली पक्की कारण और 14 वी, पंचम वित्त आयोग में अनियमितता को लेकर वीडियो में कड़ा रुख अपनाया है । बीडीओ मनोज कुमार अग्रवाल ने पंचायत के मुखिया, पंचायत सचिव, तकनीकी सहायक को एक चिट्ठी भेजते हुए जांच में पाई गई कमियों का उल्लेख किया है ‌। बीडीओ ने कहा है की सरकारी योजना गुणवत्ता पूर्ण ढंग से पूरी नहीं की जाती तो योजना पर खर्च की गयी पूरी राशि वसूलने का प्रावधान निहित है । बीडीओ ने पत्र में उल्लेख किया है कि पंचायत के अधिकांश भागों में पानी की सप्लाई बंद था । वार्ड क्रियावन्यन समिति के अध्यक्ष एवं सचिव के साथ पंचायत के मुखिया, पंचायत सचिव की जिम्मेदारी है की योजना गुणवत्तापूर्ण हो और योजना का सतत संचालन होता रहे । बीडीओ ने बताया कि जांच के दौरान 14वें वित्त आयोग, पंचम वित्त आयोग, एवं 15वें वित्त आयोग से कौन-कौन सी योजना कराई गई है इसका अभिलेख उपलब्ध नहीं कराया गया है । अभिलेख में मास्टर रोल सामग्री का अभिश्रव भी उपलब्ध नहीं होना वित्तीय अनियमितता मानी जाती है । इसके अतिरिक्त हसनपुरा पंचायत के कुछ वार्ड में योजना स्थल पर योजना का बोर्ड नहीं लगाया गया था । वार्ड में नल जल में वाल्ब लगाया नहीं मिला, क टर के साथ स्टेबलाइजर कहीं नहीं था । इसके साथ वार्ड नंबर 12, 7, 9, 13, 14 और 16 में नल जल का पाइप जमीन से निर्धारित मानक 3 फीट नहीं पाया गया । वार्ड नंबर 12, 5,6,7,9, 15 में पानी की आपूर्ति नहीं की जा रही थी । कई घरों में नल का कनेक्शन उपलब्ध नहीं था और स्टैंड पोस्ट नहीं बनाया गया था । पंचायत में की गई पीसीसी सड़क की गुणवत्ता भी निम्न स्तर का पाया गया। नल जल के लिए बनाया गया पानी टंकी की गुणवत्ता भी निम्न स्तर का था । वार्ड नंबर 6, 7, 9, 10, 11, 12, 16 में जल मीनार का काम अधूरा था । वही वार्ड संख्या 5,8, 15 में जल मीनार का काम शुरू ही नहीं किया गया था । बीडीओ ने बताया कि अभिलेख में राशि स्थानांतरण का विवरण उपलब्ध नहीं है । जांच के दौरान उन्हें वार्ड संख्या 8, 10, 11, 16 में नल जल का और वार्ड संख्या 2, 10, 11, 12, 16 में नली गली का अभिलेख उपलब्ध नहीं कराया गया है । किसी भी योजना अभिलेख पर प्रशासनिक स्वीकृति अंकित नहीं है जो यह स्पष्ट करता है कि पंचायत के मुखिया और पंचायत सचिव के द्वारा अपने कर्तव्य का सम्यक निर्वहन नहीं किया गया है । बीडीओ ने अपने पत्र में अंतिम अवसर देते हुए निर्देश दिया है कि 10 दिनों के भीतर योजना में पाई गई त्रुटियों को दूर कर लिखित प्रतिवेदन प्रस्तुत करें ।