
●तीन तरफ नदियों से घिरे सारण के मछुआरे होंगे लाभान्वित
छपरा. सामाजिक ताना-बाना में दलित घोषित नदियों के मछुआरों की माली हालत में आमूल सुधार लाने की गूंज लोकसभा में सुनाई दी। उनको व्यापक बाजार सुविधा उपलब्ध कराने और व्यवसायिक रूप से समृद्ध बनाने के कई बिंदुओं पर सारण सांसद राजीव प्रताप रुडी ने केंद्र सरकार का ध्यान आकृष्ट कराया। लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान मंगलवार को श्री रुडी ने देशभर की नदियों से मछली पकड़ने का काम करने वाले मछुआरों के लिए समुद्री मछुआरों की तरह मिलने तटीय सुविधाओं जैसे कि जेटी और बंदरगाह के निर्माण का मुद्दा उठाया। तीन तरफ नदियों से घिरे अपने संसदीय क्षेत्र सारण का उल्लेख करते हुए सांसद ने सदन में कहा कि भारत सरकार समुद्री मछुआरों को व्यापक सुविधा प्रदान कर रही है। लेकिन विभिन्न नदियों में मछलियों को पकड़ने और उसे बेचकर आजीविका चलाने वाले तीन करोड़ देशी मछुआरों को उनके नाव पार्क करने के लिए सुविधासंपन्न घाटों का निर्माण कर जेटी और मछली बेचने की सुविधा वाला बंदरगाह बनाकर मछुआरों के विकास में सरकार को योगदान करने की तरफ सदन में उपस्थित विभागीय मंत्री गिरिराज सिंह का ध्यान आकृष्ट कराया। इसपर मुंगेर से जद (यू) सांसद राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने भी श्री रुडी के प्रस्ताव का जोरदार समर्थन किया।
नदियों के मछुआरों के लिए संसद में इस तरह का प्रस्ताव पहली बार प्रस्तुत किया गया। इसपर विभागीय मंत्री गिरिराज सिंह ने सकारात्मक जवाब देते हुए कहा कि यह राज्य का मुद्दा है और यदि राज्य सरकार नदियों के मछुआरों को केंद्र की तरफ से कौन-कौन सी सुविधा दी जाय, इसका विस्तृत प्रस्ताव भेजा जायेगा तो निश्चित तौर पर उसपर कार्रवाई की जायेगी। अपने प्रस्ताव के समर्थन में श्री रुडी ने सदन के माध्यम से देश को बताया कि उनका संसदीय क्षेत्र सारण, गंगा, घाघरा, सरयू जैसी बड़ी नदियों के अलावा कई छोटी नदियों से सिंचित है। इन नदियों की मछलियों पर ही हजारों मछुआरों की आजीविका निर्भर है। ऐसे में उन्हें जेटी और बंदरगाहों के अभाव में कई समस्याओं से जूझना पड़ता है और मछलियों का उचित दाम भी नहीं मिल पाता है। यदि सरकार उन्हें सुविधायुक्त जेटी और बंदरगाह उपलब्ध कराती है तो न केवल देश की अर्थव्यवस्था में उनका योगदान सुनिश्चित हो पायेगा; बल्कि नये लोग भी इस व्यवसाय से जुड़कर रोजगार सृजन में योगदान करेंगे। सदन में मौजूद अन्य सदस्यों ने भी श्री रुडी के इस राष्ट्रहित वाले प्रस्ताव का समर्थन किया।




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