
पीएम नरेन्द्र मोदी तथा गृह मंत्री अमित शाह ने इस मॉडल को अन्य जगहों पर भी लागू करने का दिया सुझाव
दैनिक खोज खबर/छपरा। भुवनेश्वर में आयोजित अखिल भारतीय पुलिस महानिदेशक-महानिरीक्षक सम्मलेन में देश में लागू नए क़ानून बीएनएस के तहत पहली गंभीर सजा दिलाने के फलस्वरूप सारण एसपी कुमार आशीष को प्रधानमंत्री, गृहमंत्री तथा देश के तमाम पुलिस महानिदेशकों के समक्ष अपना प्रेजेंटेशन देने का मौका मिला। उन्होंने सारण जिले के रसूलपुर थाना के धनाडीह गांव में हुए तिहरे हत्याकांड से संबंधित कांड में महज 14 दिनों में अनुसंधान पूर्ण करते हुए गिरफ्तार दोनों अभियुक्तों के विरुद्ध आरोप पत्र समर्पित कर दिया था। कोर्ट द्वारा त्वरित विचारण के बाद घटना के 50वें दिन दोनों दोषी अभियुक्तों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई। डॉ कुमार आशीष ने इस दौरान अपनाए गए प्रक्रियाओं के संदर्भ में प्रेजेंटेशन दिया। वहां उपस्थित प्रधानमंत्री, गृहमंत्री,पुलिस महानिदेशक बिहार एवं उपस्थित सभी पुलिस महानिदेशकों एवं महानिरीक्षकों ने इसकी सराहना करते हुए इस मॉडल को अन्य जगहों पर भी लागू करने का सुझाव दिया।इसके पूर्व में भी 23- 24 नवंबर 2024 को बिपार्ड, गया में नए कानून के अनुपालन और चुनौतियों के संबंध में आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में मुख्य न्यायाधीश, पटना उच्च न्यायालय सहित 26 राज्यों के उच्च न्यायालयों के माननीय न्यायाधीश, एडवोकेट जनरल बिहार, निदेशक बिपार्ड सहित अन्य प्रशासनिक पदाधिकारी एवं वरीय पुलिस पदाधिकारियों द्वारा इसकी प्रशंसा की गई थी।
मामला इसी साल 16 जुलाई की हैं, जहां सनकी आशिक ने अपने एक साथी के साथ रसूलपुर थाना क्षेत्र के धनाडीह गांव में छत पर सोए प्रेमिका के पिता और उनकी दो नाबालिग बेटियों की चाकू से गोदकर मुख्य आरोपी अपनी प्रेमिका से शादी करना चाहता था, लेकिन वह मना कर रही थी। जिसको लेकर एक तरफा प्यार में आशिक ने हत्या जैसे जघन्य अपराध कृत्य का फैसला कर लिया। मौके वारदात प्रेमिका की मां ने छत से कूदकर अपनी जान बचाई थी। घटना को लेकर गांव में बेहद तनाव पैदा हो गया था। मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस कप्तान डॉक्टर कुमार आशीष ने पहुंच और अनुसंधान के लिए जांच टीम गठित कर स्पीडी ट्रायल से करने का निर्णय लिया।
मामले में नए कानून बीएनएस के तहत 14वें दिन ही न्यायालय में आरोप पत्र समर्पित कर त्वरित विचारण का अनुरोध किया गया।घटना के 19वें दिन न्यायालय ने मामले को संज्ञान में लिया।22वें दिन मामले का चार्ज फ्रेम किया गया। 27वें दिन से लेकर 44वें दिन तक त्वरित सुनवाई में प्रत्येक कार्य दिवस पर गवाही हुई और साक्ष्य प्रस्तुत किया गया। न्यायालय ने 48वें दिन दोनों आरोपी दोषी करार कर दिया और 50वें दिन सभी न्यायिक प्रक्रिया पूर्ण करने के बाद दोनों दोषियों को न्यायालय द्वारा आजीवन कारावास और 25 हजार के आर्थिक जुर्माना की सजा सुनाई गई। जिसको नए कानून बीएनएस के तहत भारत में पहली सजा मानी गई।




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