जीव जबतक भगवान की शरण मे नही जाता है उसका उद्धार नही होता है:गोविन्द जी महाराज
तरैया(सारण):27.05.2018 :
मनुष्य धन-दौलत के चक्कर में इस संसार मे रह जाता है अपने आत्मा के उद्धार के लिए कुछ नही करता है उसका सारा कार्य निष्फल हो जाता है।आत्मा की मुक्ति के लिए श्री कृष्ण के शरण मे जाना अनिवार्य है।यह जीवन जब तक भगवान की शरण मे नही जाता है उसका उद्धार नही होता है।उक्त बातें गोविन्द जी महाराज ने सिरमी गाँव में मृतक भाजपा नेता जंगबहादुर महतो के परिजनों को सांत्वना देने के बाद मृत्यु-आत्मा के ज्ञान पर चर्चा करते हुए कही।एक मनुष्य दूसरे मनुष्य की मृत्यु की देखकर अपनी मृत्यु भूल जाता है।किसी के मृत्यु होने पर रोना नही चाहिए।जीव मोह में फंस जाता है।उसकी मुक्ति के लिए भगवान से प्रार्थना करनी चाहिए।मुक्ति के दो मार्ग है एक प्रवृति का मार्ग और दूसरा निवृति का मार्ग।श्राद्ध कर्म प्रवृति का मार्ग है।श्राद्ध कर्म से परलोक मिलता है,देवलोक नही।अपने सत्कर्मो के फलस्वरूप मनुष्य को वहाँ सुविधा मिलती है।जब तक पूण्य रहता है वहाँ शांति सुविधा मिलती है जब पूण्य समाप्त हो जाता है।वहा से धकेल दिया जाता है।श्राद्धकर्म से मुक्ति नही मिलती है।भगवान का भजन मुक्ति का निवृत्ति मार्ग है।जिससे मनुष्य को मुक्ति मिलती है।जो मनुष्य भगवान की भक्ति करता है उसका पुनर्जन्म नही होता है।जन्म मरण की यात्रा से निकलने के लिए भगवान की प्रार्थना करना चाहिए।श्राद्धकर्म लौकिक विधि है।सास्वत शांति भगवान के पास है और कहि नही है।भगवान को छोड़कर संसार के धर्मो को अपना लेना सबसे बड़ा भूल है।जो लोग परमात्मा की शरण मे नही है।वह पुनर्जन्मों के चक्कर मे फंसे रहते है।मनुष्य जितना मन संसार के विषयों में लगता है अगर उतना मन भगवान में लगायेंगे तो भगवान मिल जायेंगे।और जीवन का उद्धार हो जायेगा।




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