छपरा में पदस्थापित एनएच के कार्यपालक अभियंता की सीवान में संदिग्ध अवस्था में मौत

✍परवेज अख्तर/सिवान;
सीवान : छपरा में पदस्थापित एनएच के कार्यपालक अभियंता अशोक कुमार सिंह की सीवान में शुक्रवार को संदिग्ध अवस्था में मौत हो गई। मैरवा धाम स्थित पुल पर निरीक्षण के क्रम में उनके सीने में दर्द उठा, साथ ही उल्टी भी हुई। कार्यपालक अभियंता के साथ ड्यूटी पर तैनात कनीय अभियंता विरेन्द्र कुमार शर्मा व ड्राइवर धन्नू समेत अन्य सहयोग तत्काल सदर अस्पताल लेकर पहुंचे। यहां इलाज के क्रम में उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। एनएच के कार्यपालक अभियंता अशोक कुमार सिंह की मौत की खबर मिलते ही डीएम रंजीता, डीडीसी सुनील कुमार व सदर एसडीओ संजीव कुमार सदर अस्पताल पहुंचे। डीएम ने सिविल सर्जन डॉ. अशेष कुमार, उपाधीक्षक डॉ. एमके आलम व डीपीएम ठाकुर विश्वमोहन से घटना के संबंध में विस्तृत जानकारी ली। सदर एसडीओ ने बताया कि ड्यूटी के दौरान निरीक्षण कर लौट रहे कार्यपालक अभियंता के अचानक सीने में दर्द होने पर साथ कार्य कर रहे लोगों ने सदर अस्पताल पहुंचाया, जहां मृत घोषित कर दिया गया। मेडिकल बोर्ड ने शव का पोस्टमार्टम किया है। सदर के उपाधीक्षक डॉ. एमके आलम के नेतृत्व में तीन सदस्यीय मेडिकल बोर्ड ने मृत अभियंता के शव का पोस्टमार्टम किया। मेडिकल बोर्ड में डॉ. सुनील कुमार, डॉ. रजी अहमद व डॉ. मुकेश कुमार शामिल थे। बहरहाल, मृतक आरा जिले के सहार थाना क्षेत्र के खैरा गांव के स्व. फागु सिंह के बेटे थे। पिछले जुलाई महीने से सीवान, छपरा व गोपालगंज जिले के एनएच का कार्य देख रहे थे।

ऐ जी उठिए न अब…

सीवान में विभागीय कार्य के दौरान काल के गाल में समा गए एनएच के कार्यपालक अभियंता की मौत की सूचना पर सदर अस्पताल पहुंची पत्नी के विलाप से पूरा अस्पताल परिसर गमगीन हो गया। बड़े भाई अरविन्द कुमार व भाभी के साथ अस्पताल आईं मृतक की पत्नी पति के शव को पकड़ कर रोए जा रही थी। वह बार-बार यही कहे जा रही थी कि ऐ जी उठिए न,अब आपके बिना कैसे रहंगी, आपने तो सुबह में ही मुझसे बात की थी। बड़े भाई व भाभी के समझाने-बुझाने पर कभी कहती कि आप इन्हें पीएमसीएच ले चलिए, वहां सब ठीक हो जायेगा तो कभी अब कुछ ठीक नहीं होगा भैया कहकर दहाड़ मारकर रोने लगती थी। बड़े भाई ने जब अपनी पत्नी से कहा कि तुम बहन को लेकर निकल जाओ मैं बॉडी के साथ पीछे से आता हूं तो वह कहने लगी कि मैं इनको छोड़कर कहीं नहीं जाउंगी। उनकी आंसू को देख अस्पताल के अन्य मरीज भी अपने आंसू नहीं रोक पा रहे थे। महिलाएं यह कहते हुए ढाढस बंधा रही थी कि अब चुप हो जाओ, लौट कर नहीं आयेंगे साहब।

असमय ही उठ गया बेटियों के सिर से पिता का साया

पटना से सुबह नाश्ता कर ड्यूटी पर निकले एनएच के कार्यपालक अभियंता अशोक कुमार सिंह को तब यह कहां पता था कि यह यात्रा उनके जीवन की अंतिम यात्रा साबित होगी। मृतक के साला अरविन्द कुमार ने बताया कि उनके बहनोई को दो बेटी हैं, एक मेडिकल तो दूसरी इंजीनियरिंग की पढ़ाई करती है। बताया कि बहनोई को किसी तरह की कोई समस्या नहीं थी। आज सुबह व कल शाम मेरी उनसे घंटों बात हुई थी, तब उन्होंने शारीरिक या काम-काज से संबंधित किसी तरह की समस्या के बारे में कुछ नहीं बताया था। साथ में कार्य कर रहे कनीय अभियंता विरेन्द्र कुमार शर्मा ने बताया कि निरीक्षण के दौरान सीने में दर्द व उल्टी होने पर तत्काल सदर अस्पताल लाया गया जहां इलाज के क्रम में मौत हो गई।