*किसान समस्याओं का प्राथमिकता से हो निस्तारण: प्रमोद सिंह टुन्ना*

🔘 *प्रदेश में लागू करना होगा स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट*

*पटना (बिहार)।* भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश प्रवक्ता प्रमोद सिंह टुन्ना ने कहा कि किसानों के ब्यापक हित में राज्य सरकार को हर हालत में स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करना होगा।राज्य की एनडीए सरकार किसानों की समस्याओं का समाधान करने में नाकाम साबित रही है। गन्ना और आलू के किसानों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। आज किसान करो या मरो की स्थिति में है।

उन्होंने कहा कि बिहार का किसान काफी समस्याओं से जूझ रहा है। बिहार में प्रत्येक किसान परिवार की आमदनी लगभग 4000 प्रति माह है। वर्तमान में बिहार सरकार द्वारा किसानों के बिजली बिल में वृद्धि का निर्णय किसान हितों पर कुठाराघात है। 4000 में एक परिवार का पालन करना बहुत ही असंभव काम है आज बिहार के लघु और सीमांत किसान खेती छोड़ने के लिए तैयार हैं अगर उन्हें कोई दूसरा अवसर मिले। उत्पादन लागत में वृद्धि के अनुसार फसलों का मूल्य न मिलने के कारण किसानों पर कर्ज का भार बढ़ता जा रहा है।

श्री टुन्ना ने कहा कि प्रदेश में स्वामीनाथन कमेटी के रिपोर्ट के अनुसार सभी फसलों सहित दूध का राज्य परामर्शी मूल्य तय करते हुए धान का मूल्य 2700 रु0 कुन्तल, गेंहू 2600 रु0 कुन्तल, आलू का मूल्य 1500 रु0 कुन्तल तय किया जाए। सभी फसलों की शत-प्रतिशत सरकारी खरीद की जाए।

उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र एवं निजी नलकूप की दरों में की गई वृद्धि को वापिस लेकर बिजली की दरों में कमी की जाए। देश के 7 राज्यो की तर्ज़ पर बिहार के किसानों को भी बिजली सिंचाई हेतु निःशुल्क दी जाए।

सहकारी समितियों द्वारा खरीफ का ऋण वितरण 1 अप्रैल से 31 अगस्त तक और रबी का ऋण 1 सितम्बर से 31 मार्च तक होता है। किसानों को यह ऋण पूर्व की भांति एक साथ दिया जाए।

किसान नेता श्री सिंह ने कहा कि नए मोटर वाहन अधिनियम को गुजरात सहित कई राज्यो की सरकारों ने लागू नही किया है। नए अधिनियम में जनता की राय लेकर बदलाव करते हुए कृषि वाहनों को इससे मुक्त किया जाए। प्रदेश में मोटरयान अधिनियम के 26 वे संशोधन की अनुसूची 9 के स्कूली वाहन अधिनियम के बदलाव को अगले शिक्षा सत्र से लागू किया जाए।. एनजीटी के पुराने वाहनों पर आदेश से ट्रैक्टर को मुक्त किया जाए। सभी तरह के वाहनों की समय सीमा 15 वर्ष की जाए।
कृषि वार्निकी के अन्तर्गत किसानों द्वारा पाॅपलर, सागौन, यू० के० लिप्टिस की खेती की जा रही हैं। किसानों का उत्पीड़न मण्ड़ी समिति व वन विभाग द्वारा किया जा रहा हैं। कृषि वार्निकी के अन्तर्गत आने वाले सभी वृक्षों पर सभी जनपदों में कटाई एवं ढुलाई पर लगाये गये प्रतिबन्ध को समाप्त करते हुए मण्ड़ी शुल्क भी समाप्त किया जायें। मेंथा को फसल का दर्जा देते हुए मण्ड़ी शुल्क समाप्त किया जायें।

श्री टुन्ना ने आगे कहा कि किसान सम्मान निधि योजना में राज्य सरकार का अंशदान बढ़ाकर इसे 10,000 रुपये किया जाए। आन्ध्र व तेलंगाना राज्य की तर्ज पर बिहार में भी किसानों को प्रोत्साहन राशि दी जाए। प्रदेश में एक बेहतर किसान पेंशन योजना प्रीमियम रहित चालू की जाए। जिसका लाभ 60 वर्ष की आयु के सभी किसानों को तत्काल दिया जाए।