उत्तर बिहार के प्रसिद्ध सूर्य मन्दिर कोठिया-नरांव सारण मे उमरा भक्तो व दर्शनार्थीयो का जन शैलाब
छपरा : लोक आस्था के पावन पर्व छठ के अवसर सारण जिला के गडखा प्रखंड स्थित कोठिया-नरांव सूर्यमन्दिर पर आस्था का जन शैलाब अस्तांचल सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने के लिए दो बजे दिन से ही
जुटने लगा।सूर्य मन्दिर परिसर व जल कुण्ड के घाटो पर चप्पे चप्पे छठ व्रतियो का अद्भुत नजारा
दिख रहो थे रंग बिरगे परिधान मे भक्तो का जन सैलाब मनोरम दृश्य पैदा कर रहा था।ब्रतियो ने तीन
बजे से अर्घ्य अर्पित करना शुरू कर दिया जो शाम तक जारी रहा।अर्घ्य अर्पित कर व्रतियो ने मन्नते रखी
इसके बाद भगवान सूर्य का मन्दिर मे जाकर दर्शन कर पूजा अर्चन किया और बाद मे कथा श्रवण कर घर
लौटी दूर दराज से आये छठ व्रती अपने नीजी वाहन से लौट गये वही जिनके संबन्धि कोठिया-नरांव के थे
वे अपने संबन्धियो के यहां रात्री विश्राम किये।वही लगभग एक दर्जन माताओ ने रात्री मे घाट पर ही घाट
सेवन किया और सुबह उदयांचल सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर घर लौटे।घाट पर रहने वाले माताओ मेअनीता देवी,शिवकुमारी देवी व सुरसातो देवी तो खरना के दिन ही छठ घाट पर खरना का प्रसाद बनाकर खरना किया
व अस्तांचल सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने के लिए प्रसाद बनाकर अर्घ्य अर्पित की।उनलोगो ने बताया की हमलोगो
को संतान नही था मन्त पूरी हुई तो यहा व्रत कर रही हूं।पांच वर्ष लगातार मन्दिर पर व्रत करने का मन्नत है।
उदयान्चल सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने के लिए प्रातः ढाई बजे से ही व्रतियो का तांता लगने लगा।पहले वे लोग कोशी भरे इसके बाद ब्रम्ह मूहुर्त मे ही उदयांचल सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने लगे धंटो तक जलकुण्ड मे ब्रती भक्तो की भीड देखी गई ।अर्घ्य अर्पित कर सबने भगवान सूर्य का पूजा अर्चन किया व सप्तर्सी सन्त महात्मा के प्रतिमा का पूजन किया व मन्दिर के प्रधान पूजेरी 108 श्री मनोहर दास जी महाराज से आशीर्वाद ग्रहण कर दक्षिणा व प्रसाद भेंट कर कथा श्रवण कर घर लौटे।
छठपूजा के मौके पर सूर्य मन्दिर सेवा समिति के सेवक व प्रवंधन समिति के सदस्य हर तरह की सुविधाओ को मुहैया कराया था निःशुल्क अंग्रेज़ी व होमियो पैथिक शिवर भी लगाया गया था।इसके अलावे सेवा समिति के सदस्यो के तरफ से रा मे दूर दराज से आये व्रती के परिजनो व श्रधालु भक्तो सुरक्षा कर्मी शसस्त्र बलो व संत महात्माओ के लिए भोजन का भी व्यवस्था किया गया था।लगभगग आधा दर्जन संत बेगुसराय,रांची आदि स्थलो से भगवान सूर्य का दर्शन करने व सूर्य मन्दिर का छठ देखने आये थे।कुछ संत भी व्रत किये थे जिनमे फतेहा के पूजेरी रामेश्वर दास जी महाराज प्रमुख थे।