🛑 मांडलगढ़ चुनावी गपशप 🛑

✍🏻… *दिलीप मेहता , मांडलगढ़* मांडलगढ़ के विधानसभा सीट के उपचुनाव की हवा अब ठंडी होने लगी है लेकिन चुनाव परिणाम की चर्चायें धिरे धिरे सामने आकर रोमांच पैदा कर रही है ? मांडलगढ़ में विधानसभा सीट पर पूर्व प्रधान गोपाल मालवीय ने कांग्रेस से टिकट मांगा लेकिन नहीं दिया तो मालवीय ने निर्दलिय चुनाव लडते हुये चमत्कारित ठंग से 40470 वोट लेकर कई राजनेताओ का जुकाम निकाल दिया ? इसी तरह पिछले चुनावी समर में आसींद से हगामीलाल मेवाडा ने भी निर्दलिय चुनाव लडते हुये करीब 44 — 45 हजार मत लेकर सनसनी फैला दी थी। जिले की राजनीति में यह जौडी अब छोटू और लम्बू के रूप में याद आने लगी है। अगला भविष्य क्या होगा कहा नहीं जा सकता लेकिन चर्चाओ के अनुसार चौंकाने वाली बाते सामने आ रही है।

हो सकता है कांग्रेस आलाकमान फिर मालवीय को कांग्रेस में ससम्मान शामिल करे। पिछले समय को देखा जाये तो इंजि . कन्हैयालाल धाकड का भी दमखम देख सी. पी . जोशी ने कांग्रेस में शामिल कराया था ? आज फिर हालात ऐसे ही बन रहे है क्योकि मांडलगढ़ में जातिगत वोट न होने के बावजूद भी पहली बार इतने वोट लेकर मालवीय की चर्चा ऊपर तक भी है । इसी साल के अंत तक फिर विधानसभा के चुनाव आनेवाले है तो कांग्रेस आलाकमान भी अगला कदम फूंक फूंक कर रखेगा ऐसी संभावना है । आसींद के हगामीलाल मेवाडा को भी निर्दलिय के रूप में भारी मत लाने पर कांग्रेस ने पार्टी से निकालकर फिर शामिल किया था ।

ऐसा ही नजारा यहां भी दोहराया जाने की संभावना लग रही है ? कद में छोटे गोपाललाल और कद में लम्बे हगामीलाल की यह जौडी जनता की निगाहों में छोटू और लम्बू की तरह लगने लगी है । निर्दलिय के रूप में पहले भी हगामीलाल कांग्रेस से टिकट न मिलने के कारण चुनाव लडकर जीते और विधायक रह चुके है । हगामीलाल आज कांग्रेस में है तो गोपाललाल बाहर है ? एक लंबे लाल का तो लोहा मानकर कांग्रेस फिर पार्टी में शामिल कर लाई है लेकिन दुसरे छोटे लाल पर भी वोटो को देखते हुये चिंतन हो रहा है ? जिले की राजनीति में आगे क्या फिर छोटे लाल भी आलाकमान द्धारा अगले चुनावो के कारण कांग्रेस में लोटेगे या नहीं,, इस पर आनेवाले दिनो में निगाहे रहेगी ? यह तो चर्चाये और संभावनायें है । बाकी आगे की रणनीति कैसी और क्या रहेगी … यह राम ही जाने ?? 🤷🏼‍♂🤷‍♀