• राजन महाराज ने श्रीराम कथा में प्रभु श्रीराम के बाल लीला का किया वर्णन

परवेज अख्तर।
दैनिक खोज खबर/सिवान। शहर के वीएम हाई स्कूल सह इंटर कालेज के परिसर में बुधवार की शाम अंतरराष्ट्रीय कथावाचक राजन महाराज ने श्रीराम कथा के चौथे दिन प्रभु की बाल लीला का मनोहारी चित्रण किया। उन्होंने कहा कि “राजा जी ख़जनवा दे द रानी जी गहनवा दे द” मनोहारी सोहर की प्रस्तुति पर उपस्थित श्रद्धालु झूम उठे। प्रभु श्रीराम के चूड़ा कर्म, नामकरण और यज्ञोपवित संस्कार की कथा जब राजन जी महाराज ने सुनाया तो उपस्थित श्रद्धालु भाव विभोर हो गए। श्रीराम कथा के दौरान श्रद्धालुओं में पर्यावरण बोध को जागृत करने के लिए पंच पल्लव के पौधों को भी वितरित किया जा रहा है। राजन महाराज ने कहा कि अयोध्यानगरी में भगवान श्रीराम के जन्म के बाद से ही उत्सवी माहौल बन गया । पूरे वातावरण में पवित्र सुगंध व्याप्त हो गया जिसका नाम सुनने मात्र से जीवन धन्य धन्य हो जाता है, ऐसे प्रभु बालरूप श्रीराम को पाकर अयोध्यानगरी निहाल हो गई। नामकरण संस्कार के दौरान ही गुरुजी ने कहा कि राम आनंद स्वरूप हैं तो भरत प्रेम की मूर्ति, शत्रुघ्न मौन पात्र तो लक्ष्मण सेवा के पर्याय। राजन महाराज ने श्रीराम कथा के दौरान कहा कि जीवन का वास्तविक आनंद वहीं है जो बताया न जा सके। आनंद अनुभव की चीज है। उसे सिर्फ महसूस किया जा सकता है। उसे बताया नहीं जा सकता है। उन्होंने कहा कि भगवान का भजन करना कोई मुश्किल काम नहीं है। यदि कोई बुरी आदत हो तो उसे सुधारना ही भजन होता है। आदतों में सकारात्मक सुधार ही भजन होता है। मन की तरंगों पर नियंत्रण रखना ही भजन होता है। जब मन से, कर्म से, वचन से चतुराई का जब लोप हो जाता है तो जीवन सरल हो जाता है और भगवान की प्राप्ति संभव होती है। ज्ञान की प्राप्ति के लिए विद्यालय अनुपम स्थल हैं लेकिन विद्यालयों में संस्कार और विवेक के बारे में भी शिक्षण प्रदान करने की आवश्यकता है जिसके विविध सकारात्मक प्रतिफल प्राप्त हो सकते हैं। कथा की शुरुआत यजमान श्रीराम चरित मानस की आरती से हुई। मुख्य यजमान सुभाष प्रसाद और धर्मशिला देवी के साथ डा.मनोज कुमार सिंह और डा. सीमा सौरभ, रामप्रकाश मुन्ना और सीटू देवी, ललितेश्वर प्रसाद और निर्मला देवी, रमन कुमार और मधुप्रिया, तारकेश्वर यादव आदि उपस्थित थे।