
अब नहीं रही सारण की साइकिल दीदी ‘मधु’, शोक
ロ सारण जिले में साईकिल दीदी के नाम से प्रसिद्ध मधु दीदी का अचानक निधन ने शोक
ロ दीप से जलना नहीं दीप से मुस्कान सीखों,
सूर्य से डुबना नहीं सूर्य से उत्थान सीखों ।
देखना हो अपने आपको मानचित्र में,
तो राह पर चलना नहीं राह निर्माण सीखों।
मशरक (सारण)
इस तरह की राह पर चलने वाली मधु दीदी में” गजब का उत्साह एवं उमंग था। मधु में उच्च नीच की खाई को पाटना, वेवश एवं लाचार लोगों को पग-पग पर सहायता करना, महिलाओं के उत्थान के लिए जीवन भर संघर्ष करना इनके आदत में सुमार था। नारी सशक्तीकरण के लिए महात्मा गांधी की कर्म भूमि भीतहरवा चम्पारण से दिल्ली तक की साईकिल यात्रा कर नारी सशक्तीकरण की धारा को आगे बढ़ाया। मंगल विकास समिति के बैनर तले पुरुष प्रधान समाज में अपनी एक अलग पहचान बनाई। विधवा विवाह पारिवारिक अनबन तथा विवाद को सुलझाकर परिवार में अमन चैन करवाई। बेहद मिलनसार, मृदुभाषी मधु ‘शिक्षिका’ थी। अंतिम दर्शन के लिए उमड़ी लोगों की भीड़ और परिजनों के चित्कार से पूरा माहौल गमगीन था। परंतु प्रकृति की कुरुर लीला के आगे इंसान बेवश है। सभी लोगों के मुख से यही आवाज निकल रही थी ” हे भगवान इ का कइले। लोग चर्चा कर रहे थे कि अच्छे लोग पृथ्वी पर ज्यादा दिन नहीं रहते कुदरत को शायद यही मंजूर था।




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