संजय विजित्वर ( हाजीपुर) – 1 मई मजदूर दिवस की पूर्व संध्या पर 17 फरवरी से शिक्षकों की 7 सूत्री मांगो के समर्थन में चल रही अनिश्चित कालीन हड़ताल के 74वें दिन बिहार राज्य प्रारंभिक शिक्षक संघ, जिला शाखा वैशाली ने हड़ताल में अपने प्राणों की आहुति देने वाले 64 शिक्षक/शिक्षिकाओं को श्रृद्धांजलि अर्पित की। श्रृद्धांजलि अर्पित करते हुए संघ के जिला सचिव पंकज कुशवाहा ने अपने विज्ञप्ति में कहा कि आजाद भारत के इतिहास में शिक्षकों का यह पहला आंदोलन है जिसमें 64 शिक्षक/शिक्षिका ने अपने प्राण न्योछावर किए हैं। निरंकुशता और अहंकार के प्रतीक घनानंद और शिक्षक के प्रतिशोध की भावना को लक्ष्य तक पहुंचाने वाले चाणक्य का इतिहास दुहराता नजर आ रहा है। वर्तमान में बिहार सरकार शिक्षकों के मान-सम्मान, स्वभिमान को अपने पैरों तले कुचल रही है। उन्होंने कहा कि जिन अरमानों को अपने दिल में संजोए हमारे 64 साथी संघर्ष करते हुए शहीद हुए हैं उनके अरमानों को संघ मंजिल तक पहुंचायेगा। शिक्षकों को अपनी पूंजी कहने वाले कल्याणकारी बिहार सरकार बताये कि सम्मानजनक वार्ता के लिए और कितनी पूंजी टूटने का इन्तजार है। मृत शिक्षकों की सूची राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को भी भेजी गई है।उन्होंने सरकार से अहंकार त्याग कर अविलंब सम्मानजनक वार्ता प्रदेश शिक्षक संघर्ष समन्वय समिति से करके हड़ताल समाप्त करने की मांग की। श्रद्वांजलि सभा में कोषाध्यक्ष रवीन्द्र कुमार, अश्वनी कुमार, त्रिपुरारी श्रीवास्तव सहित कई शिक्षक सोशल डिस्टेंसिग का पालन करते हुए उपस्थित होकर श्रृद्धांजलि अर्पित की।