“अडॉप्ट अ विलेज”  कार्यक्रम के तहत अधिकारी एवं कर्मी अपने गोद लिए हुए पंचायतों में पहुंचे

-एईएस/चमकी बुखार को लेकर चलाया सघन जागरूकता अभियान

-अभिभावकों से की अपील कि बच्चों को धूप में न खेलने दे।बच्चों का रखे ख्याल

-सेविका/सहायिका/आशा/ जीविका दीदियों द्वारा निभाई जा रही है महत्वपूर्ण भूमिका
 
मुज़फ़्फ़रपुर, 02 अप्रैल।
“अडॉप्ट अ विलेज” कार्यक्रम के तहत एईएस/चमकी बुखार पर प्रभावी नियंत्रण करने के मद्देनजर गोद लिए हुए पंचायतों में पदाधिकारियों ने आज अपनी उपस्थिति सुनिश्चित करते हुए  चमकी  को लेकर सघन जागरूकता कार्यक्रम को अंजाम दिया। अधिकारियों एवं कर्मियों द्वारा  संबंधित पंचायतों में बैठकें की गई। साथ ही महादलित टोलों में भ्रमण करते हुए  बच्चों एवं अभिभावकों को  चमकी को लेकर  जागरूक किया।

उनके द्वारा पंपलेट  भी बांटे गए और पढ़कर भी सुनाए गए। संबंधित पदाधिकारियों एवं कर्मियों द्वारा आंगनवाड़ी केंद्रों  समुदायिक भवन,  स्वास्थ्य केंद्रों इत्यादि का भी निरीक्षण किया गया तथा आंगनवाड़ी सेविका /सहायिका एवं आशा को प्रेरित किया गया कि वे नियमित रूप से डोर टू डोर भ्रमण करते हुए  आम लोगों को चमकी के प्रति  जागरूक करना जारी रखें।

ज्ञात हो कि एईएस/चमकी बुखार पर प्रभावी नियंत्रण को लेकर जिला पदाधिकारी के निर्देश के आलोक में प्रथम चरण में जिले के 270 पंचायतों को गोद लिया गया है जहां प्रत्येक शनिवार को अधिकारी एवं कर्मी पहुंचते  और एईएस/चमकी बुखार को लेकर उनके द्वारा सघन रूप से जागरूकता कार्यक्रम चलाया जाता है।

एईएस/चमकी बुखार एक गंभीर बीमारी है। अधिकतर एक से 15 वर्ष तक के बच्चे इस बीमारी से ज्यादा प्रभावित होते हैं

लक्षण:-
1.चमकी के साथ तेज बुखार
2.सरदर्द
3.अर्ध या पूर्ण बेहोशी

ये तीन धमकियां याद रखें :-
1.खिलाओ :- बच्चों को रात में सोने से पहले भरपेट खाना जरूर खिलाएं यदि संभव हो तो कुछ मीठा भी खिलाएं।
2.जगाओ :- रात के बीच में एवं सुबह उठते ही देखें कि कहीं बच्चा बेहोश या उसे चमकी तो नहीं।
3.अस्पताल जाओ:- बेहोशी या चमकी दिखते ही आशा दीदी को सूचित कर तुरंत निशुल्क 102 एंबुलेंस या उपलब्ध वाहन से नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र ले जाएं।

सावधानियां :-
1.तेज धूप में जाने से बचें।
2.दिन में दो बार नहाए ।
3.रात में पूरा भोजन करके सोए।
4.लक्षण दिखते हैं ओआरएस का घोल या चीनी और नमक का घोल पिलाएं। टैग वाहन या एम्बुलेंस जल्द उपलब्ध न होने के स्तिथि में अविलम्ब किसी भी उपलब्ध वाहन से बच्चे को सरकारी अस्पताल पहुँचाये।